लाक डाउन के चलते - प्रणाम पर्यटन - पहले पढ़ें, फिर घूमें

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मंगलवार, 28 अप्रैल 2020

लाक डाउन के चलते

अतिथि देवो: भव: की परंपरा पर फिदा है फ्रांसीसी परिवार
 महराजगंज(उत्तर प्रदेश) से दीपक शरण श्रीवास्तव की रिपोर्ट 
महराजगंज। लॉकडाउन ने एक माह से अधिक समय से नेपाल बॉर्डर के निकट एक गांव में रुके हुए एक फ्रांसीसी परिवार की दिनचर्या ही बदल डाली है।  धीरे धीरे इनका मन गाँव मे रमता गया तथा ये शिव मंदिर में स्तुति भी करने लगे। इस परिवार को अब यह चिंता नही कि लॉकडाउन कब खुलेगा। इस गांव के लोगों के प्यार का यह फ्रांसीसी परिवार मुरीद हो गया है। पांच सदस्यीय यह  परिवार सड़क मार्ग से दस माह से कई देशों की यात्रा पर  निकला था परन्तु इनके कदम लॉकडाउन की बाधा के कारण नेपाल बॉर्डर पर पहुचकर थम गए।  नेपाल होकर कुछ और देशों की यात्रा इन्हें करनी थी। मज़बूर होकर इन्हें  गांव में डेरा डालना पड़ा।
     फ्रांस के टालोश शहर के रहने वाले पैलेरस पेट्रीस जोसेफ अपनी पत्नी वेरजीनी अपने दो बेटियों तथा एक बेटे के साथ विश्व  पर्यटन के लिए निकले थे। यह  फ्रांसीसी परिवार एक  मार्च से भारत यात्रा पर था तथा टूरिस्ट वीजा पर वाघा बॉर्डर होते हुए भारत पहुँचा था। लॉकडाउन के कारण प्रशासन ने नेपाल जाने की अनुमति नही दी।  लाचार होकर एक माह से अधिक समय से यह परिवार सीमा से लगभग 30 किलोमीटर दूर कोल्हुआ उर्फ सिहोरवा  गाँव के शिव मंदिर में  रह रहा है। गाँव के लोगों ने भी इन्हें इतना प्यार दिया है कि इनकी दिनचर्या ही बदल गई है। आज सबसे इनकी   आत्मीयता हो गई है  और इनकी आस्था भगवान शिव में  भी होने लगी है। सुबह यह फ्रांसीसी परिवार गाँव मे स्थित शिव मंदिर में पहुचकर  शिव स्तुति में भी मन रमाने लगा है। इनकी  नेपाल से  म्यामार, इंडोनेशिया और मलेशिया होते हुए फ्रांस लौट जाने की इनकी योजना थी।
     
प्रशासन ने इनसे किसी होटल में रुकने की इच्छा व्यक्त की थी परंतु इन्होंने अपनी इच्छा से इस गाँव में ही रुकना पसंद किया था।  21 मार्च को नेपाल के लिए  यह फ्रांसीसी परिवार निकला लेकिन 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लागू होने के कारण इन्हें नेपाल सीमा पर रोक दिया गया और कहीं और रुक जाने की सलाह अधिकारियों ने दी। नेपाल  सीमा दोनों तरफ से सील हो चुकी थी। इसके बाद पहला लॉकडाउन फिर दूसरा लॉक डाउन शुरू हो गया। इन्हें लौट पाने  या नेपाल जाने का मौका ही नही मिल पाया। इस परिवार के खाने का इंतजाम गांव के लोग ही करते हैं। गाँव मे लंबे समय तक रुकने से लोगों से इस परिवार का आत्मीय लगाव हो गया है। ग्रामीण भी एक अतिथि के रूप में इनका आदर सत्कार कर रहे है।  इस परिवार के लिए प्रशासन द्वारा भी आवश्यक सामान उपलब्ध कराए जा रहे है। पेट्रीस पेशे से मोटर मेकेनिक है तथा उनकी पत्नी वेरजीनी हेल्थ विभाग में कार्यरत हैं। उनकी कार में  रुकने के लिए अस्थायी तौर पर सभी संसाधन मौजूद है। गांव के लोगों ने बताया कि गाँव के  शिव मंदिर में इन्हें  आध्यत्मिक शांति मिल रही है। सुबह स्नान करके यह लोग भगवान शिव को जल चढ़ाते है और पूजा भी करते हैं। यह फ्रेंच तथा अंग्रेजी भाषा ही जानते है परंतु अब कुछ वस्तुओं का नाम वह हिंदी में भी लेने लगे है।
        जिलाधिकारी डॉ उज्ज्वल कुमार ने बताया कि फ्रांस के दूतावास को इस बारे में जानकारी दे दी गई थी। इनकी वीजा अवधि बढ़ा दी गई है।


2 टिप्‍पणियां:

  1. हम भारतवासियों में अपनी संस्कृति , परम्परा,प्यार और अपनत्व की भावना कूट - कूट कर भरी है । भारतीय बिना किसी भेदभाव व स्वार्थ से ऊपर उठकर हरेक इंसान को अपना बना लेते हैं ।फ्रांसीसी परिवार को गाँव के लोगों ने जो अपनापन व प्यार उन्हें दिया है वह तारीफे काबिल है । गाँववासियों ने ऐसा अनूठा व्यवहार करके विदेशी परिवार को अपना बनाने के साथ साथ भारत देश का नाम भी ऊँचा किया है ।

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    उत्तर
    1. जी आप की बहुमूल्य टिप्पणी के लिए बहुत-बहुत आभार ।

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