भारतीय पर्यटकों पर टिकी है नेपाल की अर्थव्यवस्था - प्रणाम पर्यटन - पहले पढ़ें, फिर घूमें

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सोमवार, 15 जून 2020

भारतीय पर्यटकों पर टिकी है नेपाल की अर्थव्यवस्था

महाराज गंज में भारत-नेपाल सीमा पर बना प्रवेश द्वार 
                                             भारत-नेपाल सीमा से / दीपक शरण श्रीवास्तव
महराजगंज  । भारत नेपाल के बीच  नेपाल द्वारा उत्पन्न किये गए नक्शा विवाद का अभी पटाक्षेप भी नही हुआ था कि बिहार सीमा पर सीतामढ़ी के पास नेपाली पुलिस द्वारा  भारतीयों पर अन्धाधुन्ध फायरिंग करके सीमा पर आतंक पैदा करने की कोशिश कर दी गई। अभी भी सीमा पर प्रतिदिन नेपाल द्वारा कोई न कोई उकसाने वाली कार्रवाई की जा रही है। इसके कारण दोनों देशों के नागरिकों में आपसी विश्वास का संकट खड़ा हो गया है। ऐसी परिस्थिति में नेपाल की आर्थिक धुरी पर्यटन का ग्राफ पूरी तरह गिरने की संभावना है। यदि भारतीयों ने नेपाल पर्यटन का अघोषित वहिष्कार किया तो नेपाल की आर्थिक कमर टूट सकती है। यही नही भारतीय उर्वरक और बीज के  दम पर लहलहा रहे नेपाली कृषि को भी भारी नुकसान होगा।
दीपक शरण श्रीवास्तव
       नेपाल तथा भारत के रोटी बेटी के संबंध रहे है। धर्मिक आस्था तथा अन्य परम्पराएं भी काफी हद तक मिलती जुलती हैं। इसी कारण सीमाई नागरिकों में शादी विवाह के रिश्ते भी होते रहे है। भारत नेपाल के 1751 किलोमीटर लंबे सीमा पर आये दिन विवाद पैदा किया जा रहा है ।
        पर्यटन के दृष्टिकोण से भारतीय नेपाल को सर्वाधिक महत्व देते रहे हैं परंतु अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही है। लोगों का मानना है कि नेपालियों के मन मे भारत के प्रति गुस्से के कारण भारतीय पर्यटकों के साथ दुर्व्यवहार हो सकता है। एक नेगेटिव बिंदु यह भी है कि भारतीय ऐसे देश मे क्यों जाएं जहाँ भारत के प्रति दुर्भावना पनप रही है। 
मनोकामना मंदिर , नेपाल 
भारतीय पर्यटकों से नेपाल के कई सेक्टर को काफी फायदा होता है क्योंकि सबसे अधिक पर्यटक भारत से ही जाते है। काठमांडू, पोखरा, पशुपतिनाथ मंदिर, मनोकामना मंदिर आदि अनेक ऐसे स्थल नेपाल में है जो भारतीय पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है।  माओवादी आंदोलन के समय भारतीय पर्यटकों के साथ नेपाल में बुरा बर्ताव किया जाता था। साथ  ही साथ किसी भी आंदोलन में भारतीय पर्यटक नेपालियों के शिकार होते है जबकि नेपाली बड़ी संख्या में भारत मे पनाह पाते है।  यह भी सही है कि सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों की ड्यूटी के बावजूद नेपाल को खाद की लागातार तस्करी होती है। अखबारों में रोज ख़बरें छपती है। भारतीय धान गेंहू के बीज आदि के दम पर ही नेपाली खेती होती है। मादक पदार्थों  जैसे हीरोइन, गांजा आदि की खेप भारत भेजने की कोशिस चलती रहती है। खाद्य वस्तुओं की भी तस्करी खूब होती है। केंद्र सरकार से भी मदद लगातार होती है। भारत सरकार के आंख मूँदते ही सारी गतिविधि बंद हो जाएगी फिर नेपाली पर्यटन भी पूरी तरह बंद हो सकता है। ऐसी स्थिति में भारत न तो नेपाल का बड़ा भाई होगा औऱ न ही नेपाल छोटा भाई। दोनों सिर्फ होंगे पड़ोसी देश।

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