गतिविधियां / सूचनाएं - प्रणाम पर्यटन - पहले पढ़ें, फिर घूमें

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गतिविधियां / सूचनाएं




मुंशी प्रेमचंद जैसे पत्रकार आज 
के समय की सबसे बड़ी ज़रुरत
वेबीनर में विचार रखते हुए (ऊपर से नीचे) डॉ अनिल उपाध्याय,डॉ सुमन जैन एवं प्रो निरंजन सहाय । 
                                                                     प्रणाम पर्यटन ब्यूरो 
लखनऊ : बेआवाजों की आवाज़ थे मुंशी प्रेमचंद। उन्होंने अपनी रचनाओं के ज़रिये बेआवाज़ों को आवाज़ दिया। उक्त बातें इंटीग्रेटेड सोसाइटी ऑफ़ मीडिया प्रोफेशनल्स द्वारा आयोजित ई-संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे पत्रकारिता विभाग, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी के पूर्व विभागाध्यक्ष  एवं मीडिया विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर अनिल कुमार उपाध्याय ने कही। उन्होंने आगे कहा कि मुंशी प्रेमचंद भारत के ही नहीं पूरे विश्व के सम्मानित लेखकों और कथाकारों में से एक थे। पिछड़े, दबे-कुचले और समाज में हाशिये पर कर दिए गए लोगों को उन्होंने अपनी कथा-कहानियों में नायक और नायिका बनाया। आज के पत्रकारों को उनकी बेबाकी, साहस और सत्ता से लोहा लेने के गुण का अनुसरण करना चाहिए। जिनका आज के पत्रकारों में सर्वथा अभाव दिखाई देता है। भारतीय समाज में सबसे लोकप्रिय साहित्यकार, उपन्यासकार और पत्रकार मुंशी प्रेमचंद का जन्मदिन देश के अलग अलग हिस्सों में साहित्यिक गतिविधियों और रचनाधर्मिता के ज़रिए मनाया जाता रहा है। इसी कड़ी में इंटिग्रेटेड सोसाइटी मीडिया प्रोफ़ेशनल, लखनऊ द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय ई-सेमिनार का आयोजन किया गया।
ई- सेमिनार का विषय ‘मुंशी प्रेमचंद: पत्रकारिता एवं साहित्य में अवदान’ था। एक दिवसीय राष्ट्रीय ई-सेमिनार में बतौर मुख्य वक़्ता प्रोफ़ेसर निरंजन सहाय, हिंदी एवं अन्य आधुनिक भाषा विभाग, काशी विद्यापीठ वाराणसी ने मुंशी प्रेमचंद को याद करते हुए कहा कि मुंशी प्रेमचंद के अछूते पहलू की ओर दृष्टिपात करते हैं तो पाते हैं कि वे एक ऐसी भाषा के हिमायती थे जिसमें हिंदी, उर्दू, संस्कृत व फारसी शामिल हो, इस तरह की भाषा गांधी जी भी चाहते थे जिसमें आम आदमी की संवेदनाएं मुख्य हो सकती हैं। उन्होंने साहित्य में रचित पूर्व नायकों की धारणा बदल दी और गरीब श्रमिकों व फटेहाल नारियों को स्थान दिया। मुंशी जी कहते थे कि कमजोर व्यक्ति से मजबूत राष्ट्र की कल्पना नहीं की जा सकती। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि प्रो. सुमन जैन, विभागाध्यक्ष, महिला महाविद्यालय बीएचयू ने मौजूदा समय में मुंशी प्रेमचंद की पत्रकारिता और साहित्य की वर्तमान दौर में प्रासंगिकता पर बात करते हुए कहा कि आज के महामारी के दौर में मुंशी प्रेमचंद के विचार और उनकी रचनाएँ हू-ब-हू प्रासंगिक हैं। गरीबों, मजदूरों की बेबसी का जो चित्रण उन्होंने उस दौर में किया था वह आज भी यथावत है। यही कारण है कि उनके सुझाव आज भी उतने ही ताजा हैं।
डॉ प्रभा शंकर मिश्र 
कार्यक्रम के विशिष्ट वक़्ता और मुंशी प्रेमचंद के परिवार के सदस्य डॉ. दुर्गा प्रसाद ने बताया कि मुंशी प्रेमचंद का साहित्य आदमी के अंदर तड़प पैदा करता है इसके पूर्व के साहित्य में केवल मनोरंजन को प्रमुखता दी जाती थी।  आगे उन्होंने मुंशी प्रेमचंद के बेबाक और स्वाभिमानी चरित्र के उदाहरण प्रस्तुत किए। विशिष्ट वक़्ता और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के डॉ संदीप वर्मा ने मुंशी प्रेमचंद को मौजूदा समय की ज़रूरत बताया। उन्होंने आगे कहा कि मुंशी प्रेमचंद की भाषा सहज और पत्रकारिता क्रान्तिकारी थी। वो आज की ही तरह तब के जमाने में घोस्ट राइटिंग का कार्य करते थे। इस अवसर पर आईएसएमपी  के चेयरमैन श्री चंद्र शेखर ने कहा कि  आईएसएमपी लगातार साहित्य और पत्रकारिता से जुड़ी हस्तियों के विचारों और उनके कार्यों को जन सामान्य तक पहुँचाने का कार्य कर रहा है । इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का संचालन आईएसएमपी के डिप्टी चेयरमैन पूर्वी भारत डॉ. प्रभा शंकर मिश्र ने तथा धन्यवाद ज्ञापन आईएसएमपी के डिप्टी चेयरमैन उत्तर भारत सुमित कुमार पाण्डेय ने किया।इस एक-दिवसीय ई-सेमिनार में देश के अलग अलग हिस्सों से क़रीब 2000 से भी अधिक प्रतिभागियों ने गूगल मीट व लाइव स्ट्रीमिंग के जरिये हिस्सा लिया । इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में देश भर के विभिन्न राज्यों एवं विश्विद्यालयों के प्रोफ़ेसर, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं पत्रकार ऑनलाइन कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिये जुड़े थे।  कार्यक्रम में विनोद कुमार पांडेय, प्रो. अशोक कुमार पोद्दार, श्री प्रदीप श्रीवास्तव ने परामर्शदाता की भूमिका निभाई। इस एक दिवसीय ई सेमिनार के संयोजक डॉ प्रभाशंकर मिश्र, सुमित कुमार पांडेय तथा सह संयोजक डॉ अमित कुमार मिश्र और शिशिर कुमार सिंह थे।  आयोजन सचिव डॉ. मनीष जैसल तथा सह सचिव रुपाली अलोने थीं। प्रचार प्रसार और जनसम्पर्क  का ज़िम्मा श्री बीएस मिरगे ने सम्भाला । साथ ही डॉक्टर मनोज यादव,श्री सतवाजी  वनोले, नाज़रा नूर, सुदीप्त मणि त्रिपाठी, आनंद कुमार गुप्त, मनीषा सिंह, डॉ राजेंद्र नेगी, डॉ. संदीप श्रीवास्तव, शिखा पाठक, डॉ रणजीत सिंह, रामकुमार, राजीव ओझा आदि ने इस आयोजन को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भागीदारी दी।

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रेडक्रास टीबी मरीजों को गोद लेगी : हिमा बिंदु नायक 
(प्रणाम पर्यटन ब्यूरो)
लखनऊ। पिछले दिनों सुल्तानपुर के   पं.रामनरेश त्रिपाठी सभागार में इंडियन रेडक्रास सोसाइटी सुलतानपुर का द्वितीय स्थापना दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। जिसमे मुख्य अतिथि डा.हिमा बिंदु नायक, उपसभापति  इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी उत्तर प्रदेश ,  विशिष्ट अतिथि डा.श्याम स्वरूप महासचिव उत्तर प्रदेश के द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया  तथा कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए वहां पर मौजूद छय  रोग पीड़ित बच्चों को राहत सामग्री व कंबल प्रदान कर उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में गोद लेने का संकल्प दिलाया गया । इस मौके पर  इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी सुल्तानपुर के चेयरमैन डा.डीएस मिश्रा ने कहा  कि सोसाइटी द्वारा टीबी के 29 बच्चों को पौष्टिक आहार वितरित किया गया। गरीब महिलाओं को कम्बल दिया गया। मुख्य अतिथि डा.हिमा बिंदु नायक ने कहा  कि प्रधानमंत्री मोदी तथा महामहिम राज्य पाल महोदया जी का सपना है कि भारत को 2025 तक टीबी मुक्त बनाना है । जिसके लिए संस्था टीबी रोगियों को गोद लेगी तथा इन सब की सहायता के लिए हर संभव प्रयास करेगी श्रीमती  हिमा  ने एक नया इतिहास बनाते हुए छयः लोग पीड़ित बच्चों को अपना स्थान देकर स्वयं बच्चों के पीछे खड़े होकर उनका सम्मान बढ़ाया सुल्तानपुर के सचिव जय प्रकाश शुक्ल को छयः रोग पीड़ित बच्चों को  गोद लेने व आयोजन के लिए आभार व्यक्ति किया कार्यक्रम के आयोजन के लिये अनु् सचिव जार्ज बैक जी ने भी  अपने शब्दो मे सराहा । इसी क्रम मे सीएमओ डा.सीबीएन त्रिपाठी जी द्वारा मानवता के साथ अधिक से अधिक बच्चो को सहयोग हेतू सोसायटी को प्रेरित कर सम्बोधित किया जय प्रकाश शुक्ल सचिव रेड क्रॉस सोसाइटी सुल्तानपुर ने बताया कि हमारा प्रयास अधिक से अधिक बच्चों को गोद लेना तथा उन्हें छहः रोग से मुक्त दिलाना उद्देश्य और इसके  लिए हम निरंतर प्रयास करते रहेंगे तथा आए हुए अतिथियों का एवं कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले सभी बच्चों का धन्यवाद प्रस्तुत किया इस मौके बच्चों ने  स्वागत गीत संस्कृत कार्यक्रम जल संरक्षण पर नाटक प्रस्तुत किया। जिसको उपस्थित लोगों ने खूब सरहना की । साकेत पीजी कॉलेज अयोध्या के प्राचार्य अजय मोहन  श्रीवास्तव  के द्वारा  विशेष सहयोग प्रदान किया गया । इस मौके पर डा. राम आशरे,संस्था सचिव जयप्रकाश शुक्ला, अरविंद त्रिपाठी संस्था उपाध्यक्ष डा.प्रदीप मिश्रा,धर्मेन्द्र शुक्ल, विवेकानंद पांडे ओम प्रकाश शुक्ल श्रीकांत तिवारी राजकुमार मिश्रा प्रज्ञान मिश्रा ममता मिश्रा सरस्वती मिश्रा रुचि पाल अन्नू  अमिता श्रीवास्तव , वंदना राव ,शिल्पिका राठोर , राजेश्वर मिश्रा सुभाष कुमार प्रजापति अनूप कुमार प्रजापति दीपक गुप्ता, विपिन कुमार क्षमानाथ वर्मा,संजय तिवारी,आभिशेक शुक्ला,आरडी बरनवाल, नीलम चौरसिया,समेत अन्य उपस्थित रहे।

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कैलाश-मानसरोवर यात्रा 8 जून से
 नई दिल्ली /लखनऊ, कैलाश मानसरोवर यात्रा-2018 के लिए पंजीकरण मंगलवार से शुरू हो गया। विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक 23 मार्च तक इच्छुक यात्री अपना पंजीकरण करा सकते हैं। इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा पारंपरिक उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के साथ-साथ सिक्किम के नाथुला दर्रे से भी हो सकेगी। बता दें कि पिछले साल डोकाला विवाद के चलते चीन ने इस मार्ग से यात्रा की इजाजत वापस ले ली थी।
सरकार ने अपने डिजिटल अभियान के अनुरूप इस बार आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है। श्रद्धालु वेबसाइट https://kmy.gov.in पर जाकर अपना पंजीकरण कर सकते हैं। यात्रियों को आवेदन के साथ अपने पासपोर्ट के पहले पन्ने जिसमें तस्वीर और व्यक्तिगत जानकारी है और आखिरी पन्ने जिसमें पता हैं की स्कैन प्रति अपलोड करनी होगी।
विदेश मंत्रालय ने कहा कि आवेदकों में से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए श्रद्धालुओं को चुनने के लिए पूरी तरह से पारदर्शी कंप्यूटर आधारित लॉटरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। कंप्यूटर ही आवेदनों में से सौभाग्यशाली यात्री को चुनकर स्वत: इसकी जानकारी ईमेल व एसएमएस से देगा।
इस साल लिपुलेख के रास्ते से यात्रा करने पर 1.6 लाख रुपये प्रति यात्री खर्च आने का अनुमान है। जबकि नाथुला दर्रे के रास्ते यात्रा पर दो लाख रुपये का खर्च आएगा। बता दें कि लिपुलेख दर्रे के रास्ते में श्रद्धालुओं को पैदल चलना पड़ता है। जबकि नाथुला मार्ग पर वाहन से जाया जा सकता है। नाथुला रास्ते से 21 दिन में यात्रा पूरी होगी, इसमें यात्रा तैयारियों के लिए दिल्ली में तीन दिन का ठहराव शामिल है।
आवेदन करने के लिए न्यूनतम आयु 18 साल होनी चाहिए वहीं अधिकतम 1 जनवरी 2018 को 70 से अधिक नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही वह हृदय रोग व स्वास रोग किसी गंभीर से पीड़ित नहीं होना चाहिए। पहले की तरह पहली बार यात्रा करने वालों, डॉक्टरों और विवाहित जोड़ों को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस बार 60 यात्रियों के 18 जत्थे उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रवाना किए जाएंगे। वहीं, नाथुला दर्रे से 50 लोगों के 10 जत्थे रवाना करने की योजना है। यात्रा 8 जून से शुरू होगी।
पिछले साल 16 जून को कैलाश मानसरोवर यात्रा शुरू हुई थी। लेकिन डोकलाम में चीन और भारत के बीच शुरू हुए गतिरोध के बाद नाथुला के रास्ते यात्रा को बीच में ही स्थगित करना पड़ा था।



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