आलमगीर मस्जिद :जहाँ एक शाम औरंगजेब ने की थी नमाज अदा - प्रणाम पर्यटन - पहले पढ़ें, फिर घूमें

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गुरुवार, 15 फ़रवरी 2018

आलमगीर मस्जिद :जहाँ एक शाम औरंगजेब ने की थी नमाज अदा

आलमगीर मस्जिद :जहाँ एक शाम 
औरंगजेब ने की थी नमाज अदा
हैदराबाद - नागपुर राष्ट्रिय राजमार्ग नंबर सात पर निज़ामाबाद जिले के कमारेड्डी तहसील का एक गाँव पड़ता है ,जिसे बिस्वापुर के नाम से जाना जाता है |

जब आप निज़ामाबाद से हैदराबाद की ऑर चलेंगे तो रास्ते में बाएं ऑर एक मस्जिद दिखाई देगी,जिसकी एक मीनार जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है | यदपि हाल ही में वक्फबोर्ड ने इस मस्जिद की मरम्मत का काम करवाया भी  है , जिसकी दीवारों पर रंगरोगन तक कर दिए गए है ,लेकिन एक मीनार को पुरातत्व के निर्देश पर वैसा ही छोड़ दिया गया है |जिससे इसके पुराने होने का अहसास लोगों को हो सके | इस मस्जिद को "आलमगीर मस्जिद" के नाम से जाना जाता है |इसके बारे में बताते हैं की जब बादशाह औरंगजेब दक्षिण पर अपनी पताका फहराने के लिए दक्खिन की ऑर जा रहे थे तो एक शाम उनकी यहीं पर पड़ने वाली थी| इतिहास में इस बात का उल्लेख है कि वह  कट्टर ,धर्मांध प्रवृति वाला शासक था,इस लिए उसके निर्देश पर इस मस्जिद का आनन-फानन में निर्माण करवाया गया, जिसके बगल में वजू करने के लिए कुआँ भी खुदवाया गया  | कहते हैं कि जब औरंगजेब यहाँ पहुंचा तब तक सूर्य पश्चिम की ऑर अस्त होने चल पड़े थे,शाम हो चली थी ,औरंगजेब अपने लाव-लश्कर के साथ मस्जिद में रुका ओर शाम की नमाज अदा की | इतिहासकरों के अनुसार औरंगजेब में एक विशेषता थी कि वह किसी भी मस्जिद में  नमाज अदा करने के बाद "सलाम -वाल -ऐ -कुम "बोलता था,अगर इसकी प्रतिधव्नि उसे नहीं सुनी देती तो वह उस मस्जिद को तुरंत गिरव देता |शायद उसे इस मस्जिद में वह ध्वनी सुनी दे गई थी ,जिसके कारण उसने इस मस्जिद को वैसा ही छोड़ कर आगे निकल गया | विगत  कई शताब्दियों से यह मस्जिद उपेक्षित पड़ा हुआ था |जिसकी सुध वक्फ बोर्ड कमारेड्डी के अध्यक्ष एम्.ऐ.माजिद ने लेते हुए  लोगों से मिलकर जीर्णोधार का काम शुरू  करवाया | यदपि अभी भी वहां पर नमाज नहीं पड़ी जारही है |उधर से आने जाने लोग देखते हैं और चले जाते हैं |जब आप इधर से गुजरें तो इसे जरुर देखने,इसके मीनारों पर की गई नक्काशी देखने योग्य है |
चलते -चलते यह भी बताना उचित समझता हूँ कि जब औरंगजेब के हैदराबाद आने की खबर रियासत के निजाम "कुली क़ुतुब शाह " को लगी तो वह व्याकुल हो उठे कि अहिं औरंगजेब की बुरी निगाह "चारमीनार"पर न पड़ जाये,और वह उसे गिरवा दे | उनहोने तुरंत चारमीनार की उपरी मंजिल पर एक छोटी मस्जिद का निर्माण करावा दिया |बताते हैं कि औरंगजेब हैदराबाद पहुँचाने के बाद चारमीनार के बगल स्थित बड़ीमस्जिद  (मक्का मस्जिद ) में नमाज अदा की और चार मीनार का अवलोकन किया | बताते हैं कि उस समय उसे चारमीनार के वहां होने पर कुछ अजीब लगा था,लेकिन जब वह उसके उपरी हिस्से में पहुँच और वहां पर मस्जिद देखी, और उसका मन बदल गया |



                                                                                                          प्रदीप श्रीवास्तव

1 टिप्पणी:

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