प्राकृतिक व पौराणिक विरासत के क्षरण को रोकने की चुनौती..
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श्री राम की पैडी का विहंगम दृश्य
ओम प्रकाश सिंह
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जन्मभूमि, पिछले कुछ वर्षों में अभूतपूर्व विकास की राह पर अग्रसर हुई है। राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के बाद से शहर का कायाकल्प हो रहा है, जिसमें आध्यात्मिक महत्व को बनाए रखते हुए आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार और अयोध्या विकास प्राधिकरण के नेतृत्व में मास्टर प्लान 2031 के तहत 80,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं चल रही हैं। इसका उद्देश्य अयोध्या को विश्व स्तरीय तीर्थ स्थल, स्मार्ट सिटी और सस्टेनेबल शहर बनाना है। राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का कार्य पूरा हो चुका है। महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के साथ अयोध्या कैंट व धाम रेलवे स्टेशनों को आधुनिक सुविधाओं के साथ संवारा जा चुका है। यातायात के अन्य विभिन्न मार्गो पर काम तेजी से जारी है। जिसमें पंच कोसी, चौदह कोसी व चौरासी कोसी परिक्रमा मार्ग के साथ रिंग रोड तथा अयोध्या इलाहाबाद एक्सप्रेस वे का निर्माण भी शामिल है। लखनऊ गोरखपुर हाईवे को उच्चीकृत किया जा रहा है। एयरपोर्ट को बोइंग विमानों के उतरने की दिशा से भी तैयार करने की योजना है। अयोध्या धाम रेलवे स्टेशन 50000 दैनिक यात्रियों की क्षमता से विकसित हुआ है। राम पथ, भक्ति पथ, धर्म पथ और जन्मभूमि पथ का चौड़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण तो हुआ ही, बाईपास और हाईवे का विस्तार भी हो रहा। सरजू नदी का रिवर फ्रंट विकसित किया जा रहा है घाटों और बैराज निर्माण की योजनाएं धरातल पर उतर रही है।
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| डॉ राममनोहर लोहिया अवध यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति डॉ मनोज दीक्षित से चर्चा करते हुए प्रणाम पर्यटन के प्रतिनिधि श्री ओम प्रकाश सिंह |
अयोध्या मास्टर प्लान 2031...
अयोध्या विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार किया गया एक व्यापक शहरी विकास ब्लूप्रिंट है। इसका मुख्य उद्देश्य अयोध्या को एक विश्व स्तरीय आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र, स्मार्ट सिटी और सस्टेनेबल नगरी बनाना है, जिसमें परंपरा, आस्था और आधुनिकता का संतुलन हो। यह प्लान उत्तर प्रदेश सरकार के नेतृत्व में तैयार किया गया है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 2022 में अनुमोदित किया गया था। प्लान दो चरणों में विभाजित है और हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं को शामिल करता है।
लगभग 873 वर्ग किलोमीटर की योजना में 343 गांवों को जोड़ा गया है। जिसमें गोंडा से 63, बस्ती से 126 और अयोध्या उपनगरी से 154 गांव शामिल है। वर्तमान में इसकी जनसंख्या लगभग 11 लाख है। 2047 तक अनुमानित जनसंख्या 34 लाख होने की है। प्लान को 18 जोनों में विभाजित किया गया है। 2031 के लिए प्रस्तावित भूमि उपयोग में आवासीय 52.56%, व्यावसायिक 5.11%, औद्योगिक 4.65%, सार्वजनिक/अर्ध-सार्वजनिक उपयोग 10.28%, परिवहन 12.20%, हरित क्षेत्र और खुली जगहें 14.31% शामिल है।प्रमुख विशेषताएं और परियोजनाएं...
वैदिक शहर नियोजन सिद्धांतों पर आधारित, विशेष रूप से 'कर्मुक' (धनुष आकार) पैटर्न, जो सरयू नदी तट पर 30 वर्ग किमी क्षेत्र में लागू होगा। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, रिंग रोड, 84 कोसी परिक्रमा मार्ग के साथ शहर में 6 प्रमुख प्रवेश द्वार लखनऊ, सुल्तानपुर, रायबरेली, अम्बेडकर नगर, गोरखपुर और गोंडा की तरफ से आने पर बन रहे हैं। होटल, रिसॉर्ट, मल्टी-लेवल पार्किंग, टेंपल म्यूजियम, ग्रैंड एंट्रेंस गेट, सोलर पावर प्लांट, 10% क्षेत्र पार्क और हरित पट्टी के लिए, सोलर एनर्जी के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर है। रिंग रोड के दोनों ओर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाने की योजना है। लगभग 159 परियोजनाएं पर कुल ₹8,594 करोड़ खर्च किया जाएगा, जो रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देंगी।
डिजिटल गवर्नेंस, स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट, इको-फ्रेंडली वेस्ट डिस्पोजल का प्लान अयोध्या को दिव्य-भव्य-नव्य नगरी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जहां राम मंदिर के आसपास का विकास आस्था को केंद्र में रखते हुए आधुनिक सुविधाओं से युक्त है।
पर्यावरण व अन्य चुनौतियां..
बड़े पैमाने पर निर्माण से हरित क्षेत्र प्रभावित हो रहा है, हालांकि प्लान में ग्रीन बेल्ट और सोलर एनर्जी पर फोकस है। अनियंत्रित पर्यटन से प्राकृतिक विरासत को नुकसान पहुंच सकता है। ट्रैफिक जाम और बुनियादी ढांचे पर दबाव है। दीपोत्सव, नववर्ष जैसे आयोजनों में भारी भीड़ से ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा जाती है। रूट डायवर्जन और वाहन प्रतिबंध लगाने पड़ते हैं। पार्किंग की कमी और सड़कों पर दबाव से स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की भारी दिक्कतें होती हैं। मल्टी-लेवल पार्किंग और शटल सेवाओं की जरूरत बताई गई है, लेकिन तेज विकास से यह समस्या बढ़ सकती है। यदि पर्यटन प्रबंधन मजबूत हुआ, तो ये नकारात्मक प्रभाव कम किए जा सकते हैं, अन्यथा 2047 तक जनसंख्या वृद्धि (34 लाख) से चुनौतियां बढ़ेंगी। सरयू नदी के तट और रिवरफ्रंट पर बढ़ते पर्यटन से प्रदूषण का खतरा बढ़ा है। कचरा प्रबंधन, जल आपूर्ति और नदी की पारिस्थितिकी पर दबाव पड़ रहा है।
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