वर्धा 09, जनवरी 2025 : महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के 29वें स्थापना दिवस पर गुरुवार 08 जनवरी को विश्‍वविद्यालय के वाचस्पति भवन प्रांगण में भव्य सांस्कृतिक संध्या में गीत, संगीत और नृत्‍य की प्रस्‍तुतियों से परिसर सराबोर हुआ। विभिन्‍न विभागों के विद्यार्थियों ने भारत की लोक सांस्‍कृतिक परंपरा को गीत, संगीत एवं नृत्‍य की रंगारंग प्रस्‍तुतियां देकर भारत की समृद्ध सांस्‍क‍ृतिक परंपरा का परिचय दिया। कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा, कार्यपरिषद के सदस्‍य प्रो. सुरेन्‍द्र दुबे, उत्तर प्रदेश हिंदी साहित्‍य संस्‍थान की उपाध्‍यक्ष अमिता दुबे, आवासीय लेखक डॉ. क्षमा कौल व डॉ. भूषण भावे, कुलसचिव क़ादर ऩवाज ख़ान आदि की उपस्थिति में हुई इस सांस्‍कृतिक संध्‍या में विद्यार्थियों ने सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम की शुरुआत वंदे मातरम् एवं वरदे वीणा वादिनी वरदे गीत से हुई। इस संध्‍या में शास्त्रीय राग शंकरा, राजस्‍थान का समूह गीत, खुशी लोधी एवं आशुतोष दुबे का भरत नाट्यम, भाई-बहन का प्‍यार दर्शाता बिहार की प्रसिद्ध लोकनृत्य सामा-चकेवा, मिथिलांचल का झिझिया नृत्‍य, गोंड एवं कुर्मी नृत्‍य,वैष्‍णवी व यशस्‍वी द्वारा प्रस्‍तुत महाराष्ट्र की प्रसिद्ध लावणी, कोली नृत्‍य आदि की आकर्षक एवं रंगारंग प्रस्‍तुतियां दी गयी। इसके साथ ही पंजाब के भांगडा नृत्‍य दर्शकों को थिरकने पर मजबूर किया।


विश्‍वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत इन मनमोहक प्रस्‍तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोकसंस्कृति की विविध रंगों से सजी इस सांस्कृतिक संध्या के माध्यम से हिंदी विश्वविद्यालय ने अपने 29वें स्थापना दिवस को भारतीय सांस्कृतिक विरासत के साथ सराबोर होकर उत्साहपूर्वक मनाया। कार्यक्रम का संचालन प्रदर्शनकारी कला विभाग के अध्‍यक्ष डॉ. ओमप्रकाश भारती एवं विद्यार्थी मनीष तिवारी ने किया।