वर्धा, 27 जनवरी 2026: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में गणतंत्र दिवस की 77वीं वर्षगांठ पर संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि अमृतकाल के गणतंत्र में हम परिवर्तन की राह पर नए भारत के निर्माण की तरफ अग्रसर है। हमारी आंखों में उन्नत भारत और उज्ज्वल भविष्य का सपना है जिसे हमें साकार करने का संकल्प करना चाहिए।‌


विश्वविद्यालय में गणतंत्र दिवस समारोह बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। वाचस्पति भवन के प्रांगण में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिवार को संबोधित करते हुए कुलपति ने कहा कि गणतंत्र का यह अवसर हमारे स्वाभिमान और सम्मान का अवसर है। यह राष्ट्रीय पर्व पराक्रम, देशभक्ति और विकास यात्रा का भी उत्सव है। स्वाधीनता संग्राम में अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों का स्मरण करते हुए कुलपति ने कहा कि यह दिन भारत के निर्माताओं को याद करने का दिन है। आज के दिन हमें समृद्ध लोकतंत्र मिला, जिसने न्याय और समतामूलक ढांचे में गरिमापूर्ण जीवन जीने की गारंटी दी।‌ हमें अधिकार और कर्तव्य की आचार संहिता दी। ‌आजा़दी दिलाने में योगदान देने वाले तमाम समाज वैज्ञानिक, साधु, पीर, कलाकार एवं रचनाकार आदि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनके संघर्ष और चिंतन-मनन की बदौलत हमें सामाजिक न्याय का सूत्र व मानवीय मूल्य मिले जिसे हमें याद रखने की जरूरत है। विकसित भारत-2047 के संबंध में कुलपति ने कहा कि देश के वर्तमान नेतृत्व ने हमें विकसित भारत का जो सपना दिखाया है, उसे साकार करने के लिए कटिबद्ध होना चाहिए। ‌देश में मनुष्य जाति के हित में सामाजिक-आर्थिक सरोकार दिखाई दे रहे हैं। ऐसी अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं जो देश को प्रगति की राह पर ले जा रही हैं।


कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि इस वर्ष के गणतंत्र दिवस की थीम वंदे मातरम् रखी गई है। हम वंदे मातरम गीत की 150 वीं जयंती मना रहे हैं। यह एक ऐसा मंत्र है जिसने स्वाधीनता आंदोलन के दौरान असंख्य देशभक्त पैदा किये। यह गीत सन 1875 में बंगाल की धरती पर बंकिमचंद्र चटर्जी ने लिखा, जो स्वाधीनता आंदोलन का शंखनाद बना। ‌वह प्रेरणात्मक राष्ट्रीयता का दौर था जिसने राष्ट्र चेतना का बीज बोया।‌ हमें बंकिम चंद्र चटर्जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए। देश की युवा शक्ति के सपने और भविष्य की बात करते हुए कुलपति ने कहा कि आज देश युवा शक्ति से ओतप्रोत है। हमारे युवा विश्व में पहचान बना रहे हैं। ‌तकनीक का क्षेत्र केवल उपभोक्ता बाजार ही नहीं नवाचार का निर्माता भी है जिसमें युवाओं की बड़ी भूमिका है।‌ दावोस सम्मेलन में भी भारत की चर्चा रही। भारत को विश्वव्यवस्था देखने के लिए संकेत किया गया। ‌उन्होंने कहा कि भारत टकराव से नहीं अपितु सहयोग व  संतुलन की भाषा बोलने वाली शक्ति के रूप में ग्लोबल साउथ की आवाज बनने के लिए तत्पर है।‌ हमारे युवा ऊर्जा से उद्भाषित है। उनमें असीम शक्ति और कौशल है। हमें उनके सपनों पर भरोसा करना चाहिए। उन्होंने आवाह्न किया कि हमें अपनी भीतर की क्षमता और योग्यता का इस्तेमाल देश हित में करना चाहिए।


ध्वजारोहण के अवसर पर मंच पर कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान, परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुरेंद्र गादेवार, वित्ताधिकारी पी. सरदार सिंह, अधिष्ठातागण प्रो. हनुमानप्रसाद शुक्ल, प्रो. अवधेश कुमार, प्रो. प्रीति सागर, प्रो. फरहद मलिक, प्रो. गोपाल कृष्ण ठाकुर, प्रो. जनार्दन कुमार तिवारी, आवासीय लेखक डॉ. क्षमा कौल की उपस्थिति रही। ध्वजारोहण समारोह के प्रारंभ में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने महात्मा गांधी एवं बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर नमन किया।‌ ध्वजारोहण के दौरान ने सुरक्षा कर्मियों के बैंड समूह ने राष्ट्रगान प्रस्तुत किया तथा राष्ट्रीय कैडेट कोर के छात्रों ने परेड की। सीनियर अंडर ऑफिसर कमांडर हर्ष गुप्ता ने राष्ट्रीय कैडेट कोर का प्रतिनिधित्व किया। इस अवसर पर शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।‌