महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय पुस्तक मेले का हुआ उद्घाटन
वर्धा, 7 जनवरी 2026: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में बुधवार को चार दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेले के उद्घाटन में पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल 'निशंक' ने कहा कि पुस्तकें केवल ज्ञान ही नहीं देतीं, बल्कि जीवन को दिशा और चेतना भी प्रदान करती हैं। दुनिया में पुस्तक से बड़ा कोई मित्र नहीं है।
विश्वविद्यालय अपना 29वाँ स्थापना दिवस 7 से 10 जनवरी 2026 तक भव्य रूप से मना रहा है। इस अवसर पर शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जा रही है। चार दिवसीय समारोह का शुभारंभ विश्वविद्यालय परिसर स्थित बोधिसत्व डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर समता भवन के प्रांगण में आयोजित राष्ट्रीय पुस्तक मेले के भव्य उद्घाटन के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की। पुस्तक मेले का उद्घाटन भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने फीता काटकर किया। उद्घाटन के पश्चात समता भवन परिसर में स्थित डॉ. बाबा साहेब की प्रतिमा पर सभी सम्मानित अतिथियों एवं विश्वविद्यालय अधिकारियों द्वारा पुष्प अर्पित किए गए। उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्यकार डॉ. भूषण भावे एवं डॉ. क्षमा कौल उपस्थित रहीं।
मुख्य अतिथि डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि यदि उत्तराखंड संस्कृति का केंद्र है, तो वर्धा ज्ञान और चेतना का केंद्र है। जब संस्कृति और ज्ञान का संगम होता है, तब नए विचार और नए ज्ञान का प्रवाह जन्म लेता है। उन्होंने कहा कि हिंदी विश्वविद्यालय की गरिमा न केवल भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर स्थापित है। उन्होंने विद्यार्थियों को नियमित रूप से डायरी लेखन के लिए प्रेरित किया और कहा कि हाथ से लिखा हुआ शब्द अजर- अमर होता है। उन्होंने गांधी और विनोबा की कर्मस्थली वर्धा को ऊर्जा का केंद्र बताते हुए कहा कि हम उनकी जैसी कुर्बानी भले ही नहीं दे सकते परंतु अपना योगदान तो जरूर दे सकते हैं। उन्होंने वर्धा विश्वविद्यालय के हिंदी में उल्लेखनीय योगदान का जिक्र करते हुए सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों से अपील की कि वें हिंदी का योद्धा बने और हिंदी को विश्व पटल पर स्थापित करने की दिशा में कार्य करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि हिंदी के वैभव के सामने दुनिया की कोई भाषा खड़ी नहीं हो सकती। हमें हिंदी का ध्वजवाहक बनकर दुनिया का नेतृत्व करना होगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में सभी अतिथियों, अध्यापकों, वर्धा निवासियों एवं विद्यार्थियों का स्वागत किया। उन्होंने डॉ. निशंक के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए उनकी साहित्यिक यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पुस्तकें समय मांगती हैं, लेकिन बदले में अमूल्य चेतना प्रदान करती हैं। आज जिस प्रांगण में हम उपस्थित हैं, वह पुस्तकों की दुनिया से सुसज्जित हो गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुद्रित पुस्तकों का अस्तित्व न तो समाप्त हुआ है और न ही भविष्य में समाप्त होने वाला है। उन्होंने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की अपार क्षमता का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी क्षमताओं को सकारात्मक मोड़ देने की आवश्यकता है।
वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद, कार्य परिषद के सदस्य डॉ. गोविंद सिंह ने अपने वक्तव्य में हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर इसके विकास-क्रम पर प्रकाश डाला। इसकी स्थापना के पीछे की परिकल्पना को भी उन्होंने उद्धृत किया। उन्होंने कहा कि आज हिंदी देश की प्रमुख राष्ट्रीय भाषाओं में सशक्त रूप से स्थापित हो रही है।
वरिष्ठ साहित्यकार, लेखक एवं विश्वविद्यालय की कार्य परिषद के सदस्य तथा केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि आज का समाज पुस्तकों से धीरे-धीरे विमुख हो रहा है, जबकि पुस्तकें मनुष्य से संवाद करती हैं और संवेदनाओं को जागृत करती हैं। उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक पुस्तकें पढ़ने और खरीदने की अपील करते हुए कहा कि साहित्य अभिव्यक्ति का सर्वोत्तम माध्यम है।
अतिथियों ने पुस्तक मेले में लगे विभिन्न प्रतिष्ठित प्रकाशनों वाणी प्रकाशन, रावत पब्लिकेशन, प्रभात प्रकाशन, साहित्य अकादमी (मुंबई), नई किताब, राष्ट्र भाषा प्रचार समिति, विश्वविद्यालय के प्रकाशनों सहित अन्य प्रकाशनों के स्टॉलों का भ्रमण किया और पुस्तकों का अवलोकन किया। इस अवसर पर प्रकाशनों द्वारा अतिथियों को पुस्तकें भेंट भी दी गई। साथ ही हिंदी विश्वविद्यालय के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तकों एवं पत्रिकाओं की जानकारी ली गई। बहुवचन पत्रिका के नवीनतम विशेषांक के संबंध में प्रो. कुमुद शर्मा ने विशेष जानकारी प्रदान की।
कार्यक्रम में पुष्पमाला एवं गांधी स्मृति-चिह्न भेंट कर कुलपति द्वारा डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ का स्वागत किया गया। तत्पश्चात सभी विशिष्ट अतिथियों का औपचारिक अभिनंदन किया गया। मेले में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, विद्यार्थी, शोधार्थी, कर्मचारी एवं वर्धा के स्थानीय नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. कादर नवाज़ खान ने किया, जबकि मंच संचालन सहायक प्रोफेसर डॉ. संदीप मधुकर सपकाळे ने किया।



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