बदनावर में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन
बदनावर (धार) : राजू गजभिये
नगर परिषद द्वारा आयोजित प्रसिद्ध बैजनाथ महादेव फूल डोल मेले के अवसर पर सोमवार रात में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन संपन्न हुआ। जिसमें कवियों ने एक से बढ़कर एक कविताएं सुनाकर खूब दाद बटोरी। आयोजन मध्यरात्रि तक चला । कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री राजवर्धनसिह दत्तीगांव थे। अन्य अतिथियो में पूर्व राज्यमंत्री महेंद्रसिंह पिपलीपाडा, भाजपा ओबीसी मोर्चा प्रदेश महामंत्री नरेंद्र राठौड़, भाजपा जिला उपाध्यक्ष प्रेमचंद परमार, भाजपा नेता मनोज ऊंटवाल, भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष मनीष गुर्जर, भाजपा नेता राजेंद्र सराफ, प्रितेशसिह पंवार, देवेंद्र मोदी, नारायणसिंह देवड़ा आदि भी अतिथि रूप में मंचासीन थे।
नपाध्यक्ष मीना शेखऱ यादव, उपाध्यक्ष राजेंद्रसिंह पंवार, सीएमओ लालसिंह राठौर, मेला समिति अध्यक्ष चेनाबाई भेरूलाल डामर, पार्षद भारती राठौड़, जितेंद्र शर्मा, अनिता सन्तोष चौहान, दीपक जाधव, झन्नुबाई सिर्वी, सन्तोष राव, सुखराम देवदा, महिपालसिह पंवार, जगदीश पाटीदार, बबिता चेतन नागल आदि ने अतिथियो का स्वागत किया।
नपाध्यक्ष मीना शेखऱ यादव ने स्वागत भाषण देते हुए मेले में नगर परिषद की ओर से किए गए नवाचार के बारे में बताया। साथ ही उन्होंने 25 मार्च को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के जन्मदिन के अवसर नगर के 10 साल से कम आयु के बच्चों को निशुल्क मेला दिखाने व झूले में झुलाने की घोषणा भी की।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए पूर्व कैबिनेट मंत्री दत्तीगांव ने कहा कि मेला हमारी वर्षो पुरानी वैभवशाली परंपरा है। इसकी भव्यता ओर बढ़े। इसको लेकर हमे काम करना है। 130 वर्षो से चलाई जा रही मेला आयोजन की इस परम्परा को जीवित रखना बड़ी गर्व की बात है। यह मेला भारतीय सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत की पहचान है। मेला हम सभी धर्म व जाति के लोगों काे आनंद व खुशी देता हैं। उन्होंने सभी को आपसी प्रेम के साथ मेला का लुत्फ उठाने की अपील की। आगे कहा कि बैजनाथ महादेव मंदिर हमारी आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसके जीर्णोद्धार के लिए हम वरिष्ठ अधिकारियों से बात कर राशि मंजूर करवाएंगे। कार्यक्रम को पूर्व राज्ययंत्री पिपलीपाडा ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम का संचालन भाजपा जिला सह मीडिया प्रभारी मनोज सोलंकी कवि ने किया। आभार मेला समिति अध्यक्ष चेनाबाई भेरूलाल डामर ने माना।
मंचीय कार्यक्रम पश्चात कवि सम्मलेन शुरू हुआ। अतिथियों ने वीर रस के कवि जगदीश सोलंकी (कोटा) और अशोक चारण (जयपुर), हास्य रस के बलवंत बल्लू (उदयपुर), अशोक नागर (शाहजहांपुर), संजय खत्री (इंदौर) और गोपाल कावलिया (बदनावर), तथा गीत-गजल के शुभम त्यागी (मेरठ, यूपी) और गीतकार अमितोष माथुर (बदनावर) व सूत्रधार राष्ट्रीय कवि राकेश मोहन शर्मा (बदनावर) का स्वागत कर कवि सम्मेलन कि शुरुआत की।
सर्वप्रथम दिल्ली से आई श्रंगार रस की कवियित्री शुभम त्यागी ने सरस्वती वंदना के साथ कवि सम्मेलन कि शुरुआत की। इसके बाद बदनावर के हास्य कवि गोपाल कावलिया ने गौमाता को लेकर कविता सुनाकर दाद बटोरी, बदनावर के गीतकार अमितोष माथुर ने बेटियों को लेकर कविता सुनाई। जिस पर तालिया बजी। इसके पश्चात बेटमा से आए हास्य कवि संजय खत्री ने अपने कालेपन को लेकर एक से एक कविताएं सुनाकर श्रोताओं को लोटपोट कर दिया।
इसके बाद वीर रस के कवि अशोक चारण ने सदन में देशभक्ति का रंग घोल दिया। कविता की शुरुआत जोड़ने की बात कहकर देश जोड़ा जाएगा तोड़ने की बात कहकर नहीं से तालियां बटोरी। वो भगत सिंह अपने भारत की तरूणाई में जीवित हैं। आजादी की दुल्हन का दूल्हा बड़ा दीवाना था। उस तिरछी टोपी वाले ने गोरों को सीधा कर डाला था। ये रोने वाली भगत सिंह की मां कैसे हो सकती है...पर भी तालियां बटोरकर आपनी कविता का समापन किया।
हास्य कवि बलवंत बल्लू ने बेटियों पर अपनी रचना में कहा कि ओस की बूंद होती है बेटियां, सबका विश्वास होती है बेटियां, बेटा तो एक ही घर आबाद करता है, दो-दो घर आबाद करती है बेटियां, सुनाकर खूब तालियां बटोरी। कवियत्री शुभम त्यागी ने कहा मोहब्बत का अपनी असर देख लेना, उड़ेगी हवा सी खबर देख लेना, हमें साथ ले लो अकेले ना जाओ, ना काटे कटेगा सफर देख लेना। हास्य कवि अशोक नागर ने भी एक से बढ़कर एक हास्य कविताओं से श्रोताओं की दाद बटोर कर वाहवाही लूटी।
वीर रस के कवि जगदीश सोलंकी की ओजस्वी कविता ने सभी को भाव विभोर कर दिया। राष्ट्रभक्ति की भावना प्रेरित काव्यपाठ करते हुए उन्होंने कहा कि सीमाओ के प्रहरी अगर सीमाओं पर न नहीं होते, होली न दीवाली कोई तीज न त्यौहार है। दरवाजे तो क्या है, खिड़की खोलने से भी पहले, सोचते बाहर की हवा की रफ्तार क्या है। इसके अलावा उन्होंने अपनी प्रसिद्ध कविता "यूँ तो साथ देने को हजारों हाथ और है, पर तू जो संग में रहे तो तेरी बात और है। चंद आंसू क्या गिरे कि उम्र तक भिगो गए, दिल की धूल क्या उड़ी कि रास्ते ही खो गए, लाख जतन कर जगाया तेरे अरमां सो गए। तुम हमारे हो न सके हम तुम्हारे हो गए। जैसे चाँद को सदा निहारता चकोर है, तू जो संग में रहे तो तेरी बात और है। इस कविता पर उन्होनें श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। कवि सम्मेलत का संचालन राष्ट्रीय कवि राकेश मोहन शर्मा ने किया। शर्मा ने पुलिस, नेताओ पर कविताएं सुनाकर लोटपोट कर दिया। कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद थे।





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