यूपी की पहचान बनेगी लोक संस्कृति, नई पहल से बढ़ी उम्मीदें
लोक कला को उसका असली सम्मान दिलाना हमारा लक्ष्य: जयवीर सिंह
लखनऊ, 25 मार्च 2026: उत्तर प्रदेश की लोक और जनजातीय संस्कृति को नई पहचान दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। परंपराओं को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से आज एक अहम समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिससे सांस्कृतिक क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है।
यह समझौता उत्तर प्रदेश लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान, लखनऊ और स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय, मेरठ के बीच हुआ। इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रमोद कुमार शर्मा और संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के आवास पर किया गया, जहां इस महत्वपूर्ण पहल को औपचारिक रूप दिया गया।
इस समझौते के तहत दोनों संस्थाएं अब शिक्षा, शोध, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगी। लोक और जनजातीय कला के संरक्षण के लिए संयुक्त रूप से कार्यशालाएं, सेमिनार, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिससे कलाकारों और छात्रों को सीधे लाभ मिलेगा।
इस पहल का एक बड़ा उद्देश्य पारंपरिक कलाकारों और शिल्पकारों को मजबूत करना भी है। उनके कौशल विकास, दस्तावेजीकरण और प्रचार-प्रसार पर खास ध्यान दिया जाएगा, ताकि उनकी कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सके और नई पीढ़ी भी इससे जुड़ सके।
लोक एवं जनजाति संस्कृति संस्थान ने पहले भी कई बड़े और प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौते किए हैं। इनमें छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, प्रयागराज, गोविंद बल्लभ पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज, सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केन्द्र (नई दिल्ली), NTPC के रिहंद थर्मल पावर, बीजपुर (सोनभद्र), बुंदेलखंड कॉलेज, झांसी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी, लखनऊ विश्वविद्यालय, जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया, सोन चिरैया लोक संगीत उत्थान समिति और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र, नई दिल्ली शामिल हैं। इन सभी संस्थानों के साथ मिलकर काम करने से यह साफ दिखता है कि संस्थान लगातार सक्रिय है और सांस्कृतिक क्षेत्र में अपने काम और सहयोग का दायरा बढ़ा रहा है।
इस अवसर पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि, यह समझौता प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस साझेदारी से उत्तर प्रदेश की लोक और जनजातीय संस्कृति को देश और दुनिया में नई पहचान मिलेगी, और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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