प्रश्नोत्तरी, चित्रकला प्रतियोगिता एवं प्रदर्शनी का आयोजन
लखनऊ: 18 अप्रैल, 2026 / संस्कृति मंत्री, उ०प्र० श्री जयवीर सिंह जी की प्रेरणा, अपर मुख्य सचिव, संस्कृति विभाग, श्री अमृत अभिजात जी के मार्गदर्शन एवं निदेशक, उ०प्र० संग्रहालय निदेशालय डा० सृष्टि धवन जी के निर्देशन में राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा आज दिनांक 18 अप्रैल, 2026 को विश्व धरोहर दिवस के उपलक्ष्य में हमारी धरोहरें, हमारा गौरव विषय पर आधारित एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके अन्तर्गत संग्रहालय में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासतों और स्मारकों को दर्शाती एक प्रदर्शनी लगाई गई। इस अवसर पर भारत एवं विश्व की धरोहरों पर आधारित प्रश्नोत्तरी एवं चित्रकला प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया।
प्रतिवर्ष 18 अप्रैल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व धरोहर दिवस मनाया जाता है। इसकी शुरुआत वर्ष 1982 में इंटरनेशनल काउंसिल ऑन मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स द्वारा की गई थी, जिसे वर्ष 1983 में यूनेस्को द्वारा वैश्विक मान्यता प्रदान की गई। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य संपूर्ण मानवता की सांस्कृतिक विविधताओं और ऐतिहासिक विरासतों के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता फैलाना है। साथ ही, यह दिन हमें उन प्राचीन स्मारकों और स्थलों के महत्व को याद दिलाता है जो समय की मार झेल रहे हैं और जिन्हें भावी पीढ़ियों के लिए बचाना हमारा सामूहिक दायित्व है।
संग्रहालय द्वारा आयोजित प्रदर्शनी में देश की सांस्कृतिक विश्व धरोहरों के छायाचित्रों को प्रदर्शित किया गया। प्रदर्शनी में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में वर्ष 1983 में शामिल भारत के सर्वप्रथम स्थलों अजंता एवं एलोरा की गुफाओं, आगरा का किला एवं ताजमहल से लेकर वर्ष 2024 में शामिल असम के चराईदेव में स्थित अहोम राजवंश की टीला-दफन प्रणाली तक के चित्रों को प्रदर्शित किया गया है। प्रदर्शनी का उद्घाटन डॉ० संजय कुमार बिस्वाल, निदेशक, प्राणि उद्यान, लखनऊ द्वारा किया गया। प्रदर्शनी का बड़ी संख्या में दर्शकों एवं कलाप्रेमियों द्वारा अवलोकन किया गया।
कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालयीय छात्र-छात्राओं के लिए विश्व धरोहर विषयक चित्रकला एवं प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवा पीढ़ी को भारत के ऐतिहासिक स्मारकों, प्राचीन वास्तुकला और सांस्कृतिक महत्व के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। प्रतिभागियों ने अपनी रचनात्मकता और ज्ञान के माध्यम से भारत की गौरवशाली परंपराओं को जीवंत कर दिया। प्रतियोगिताओं में श्री बालाजी इण्टरनेशनल स्कूल, लखनऊ, करामत हुसैन मुस्लिम गर्ल्स इण्टर कालेज, लखनऊ, सहाय सिंह बालिका इण्टर कालेज, नरही, लखनऊ, लखनऊ पब्लिक स्कूल्स एवं कालेजेज, लखनऊ, ग्रीनफील्ड पब्लिक स्कूल, विद्या मंदिर गर्ल्स हाईस्कूल, नरही, लखनऊ, सरस्वती विद्यालय कन्या इण्टर कालेज, नरही, लखनऊ, विज्ञान फाउण्डेशन, लखनऊ, नवयुग रेडियन्स एस०एस० स्कूल, लखनऊ आदि विद्यालयों के 267 प्रतिभागियों द्वारा भाग लिया गया। चित्रकला प्रतियोगिता का प्रथम पुरस्कार, प्रियांश वर्मा, बाल निकुंज इण्टर कालेज, द्वितीय पुरस्कार अक्षत मिश्रा, लखनऊ पब्लिक स्कूल एण्ड कालेजेज एवं तृतीय पुरस्कार यशी शुक्ला, ग्रीनलैण्ड पब्लिक स्कूल, लखनऊ को प्राप्त हुआ। प्रतियोगिता का सांत्वना पुरस्कार अथर्व शंकर, काजल यादव, एंजल वर्मा, देवश्री सेन एवं मरियम शोएब को प्राप्त हुआ। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का प्रथम पुरस्कार आराध्या सिंह, लखनऊ पब्लिक स्कूल एण्ड कालेजेज, सहारा स्टेट, जानकीपुरम, द्वितीय पुरस्कार श्रियांश अस्थाना, लखनऊ पब्लिक स्कूल एण्ड कालेजेज, बी ब्लाक, राजाजीपुरम् एवं तृतीय पुरस्कार ओजस तिवारी, लखनऊ पब्लिक स्कूल एण्ड कालेजेज, वृन्दावन शाखा को प्राप्त हुआ। प्रतियोगिता के सांत्वना पुरस्कार आलेख वर्मा, साक्षी सोनकर, यजत उपाध्याय, छविमणि त्रिपाठी एवं शशांक यादव को प्रदान किया गया।
कार्यक्रम के समापन पर आयोजित पुरस्कार वितरण समारोह में डॉ० संजय कुमार बिस्वाल, निदेशक, नवाब वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान, लखनऊ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। डॉ० बिस्वाल ने विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार और प्रमाण-पत्र प्रदान किए। मुख्य अतिथि डॉ० संजय कुमार बिस्वाल ने अपने संबोधन में कहा, सांस्कृतिक धरोहरें किसी भी राष्ट्र की पहचान होती हैं। आज की युवा पीढ़ी का इन विरासतों से जुड़ना न केवल गर्व का विषय है, बल्कि भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी है। उन्होंने राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा आयोजित इस सार्थक पहल की सराहना करते हुए प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। प्रतिभागियों को सम्बोधित करते हुए निदेशक, राज्य संग्रहालय, लखनऊ डॉ० विनय कुमार सिंह ने कहा कि विश्व धरोहरें हमारी साझा संस्कृति और इतिहास की अमूल्य पहचान हैं, जो पूरी मानवता के लिए गर्व का विषय हैं। ये ऐतिहासिक स्मारक और प्राकृतिक स्थल हमें अपने पूर्वजों की कला, कौशल और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देते हैं। इनको संरक्षित करना हमारा सामूहिक उत्तरदायित्व है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इनके गौरव का अनुभव कर सकें। आइए, हम संकल्प लें कि हम अपनी इस अमूल्य विरासत की रक्षा करेंगे और इसे सुरक्षित बनाए रखेंगे।
कार्यक्रम के अन्त में निदेशक, डॉ० सिंह ने मुख्य अतिथि डॉ० बिस्वाल, उपस्थित गुरुजनों, प्रतिभागियों तथा प्रेस एवं मीडिया के बंधुओं के प्रति आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ० मीनाक्षी खेमका, सहायक निदेशक (सज्जा कला), राज्य संग्रहालय, लखनऊ द्वारा किया गया। उक्त अवसर पर श्री धर्मेन्द्र यादव, सुश्री प्रीति साहनी, डॉ० अनिता चौरसिया, डॉ० मनोजनी देवी, श्रीमती शालिनी श्रीवास्तव, श्रीमती गायत्री गुप्ता, श्रीमती शशिकला राय, श्री गौरव कुमार, श्री अरुण मिश्रा सहित संग्रहालय एवं प्राणी उद्यान के कार्मिक उपस्थित रहे।
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