रायपुर। “छत्तीसगढ़ मं अब पर्यटन सिरिफ घूमे-फिरे के बात नई रहि गे हे, ए अब रोजगार, पहचान अउ विकास के नवा रस्ता बनत हे।” यही भाव अब छत्तीसगढ़ की पर्यटन नीति और जमीनी कार्यप्रणाली में स्पष्ट दिखाई देने लगा है। प्राकृतिक वैभव, पुरातात्विक धरोहर और जनजातीय संस्कृति से समृद्ध छत्तीसगढ़ अपने प्रमुख स्थलों को सिग्नेचर डेस्टिनेशन के रूप में विकसित कर राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान गढ़ रहा है। स्थानीय समुदायों और युवाओं को पर्यटन प्रचार से जोड़कर ग्रासरूट ब्रांडिंग को गति दी जा रही है, वहीं पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के माध्यम से होटल, रिसॉर्ट, होम-स्टे और आतिथ्य सेवाओं में निवेश आकर्षित करने के प्रयास तेज हुए हैं। पर्यटन अब केवल भ्रमण नहीं, बल्कि कौशल, कनेक्टिविटी, सुविधा और पहचान—इन चार स्तंभों पर खड़ा उभरता विकास मॉडल बनता दिख रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पर्यटन को विकास के प्रमुख इंजन के रूप में देखने की स्पष्ट सोच दी है। विभागों को निर्देश हैं कि योजनाएँ केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित न रहें, बल्कि युवाओं के कौशल विकास और जनभागीदारी से सीधे जुड़ें। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल इन्हीं दिशा-निर्देशों के अनुरूप पहलों को जमीनी स्तर पर गति दे रहे हैं।
कई वर्षों के अंतराल के बाद टूरिस्ट गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रमों को पुनः आरंभ किया गया है। युवाओं को विरासत, संचार कौशल, पर्यटक प्रबंधन और स्थानीय इतिहास की जानकारी देकर एक सक्षम टूरिज्म वर्कफोर्स तैयार की जा रही है, ताकि पर्यटन सीधे रोजगार से जुड़े। बस्तर, सरगुजा, कबीरधाम और महासमुंद जैसे अंचलों के युवाओं की भागीदारी इस पहल को व्यापक आधार दे रही है। प्रशिक्षण के साथ-साथ स्थानीय कला, हस्तशिल्प, लोकनृत्य और पारंपरिक व्यंजनों को भी पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है, जिससे आगंतुकों को समग्र सांस्कृतिक अनुभव मिल सके और स्थानीय परिवारों की आय बढ़े।
अवसंरचना सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कबीरधाम स्थित भोरमदेव मंदिर परिसर में टूरिज्म कॉरिडोर विकसित कर पहुँच मार्ग, पार्किंग, प्रकाश व्यवस्था और आगंतुक सुविधाएँ बेहतर की जा रही हैं। सरगुजा का मैनपाट ईको-फ्रेंडली पर्यटन और वेलनेस गतिविधियों के लिए विकसित हो रहा है। बस्तर का भव्य चित्रकोट जलप्रपात और महासमुंद का ऐतिहासिक सिरपुर पुरातत्व परिसर राज्य की विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय मंचों पर स्थापित कर रहे हैं। इन स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं, व्यू-पॉइंट, साइनज, स्वच्छता और स्थानीय गाइड व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा रहा है।
सरकार की नीतियों के तहत होम-स्टे, ग्रामीण पर्यटन और जनजातीय क्षेत्रों में सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है। स्वयं सहायता समूह, स्थानीय युवा और परिवार पर्यटन सेवाओं से जुड़कर प्रत्यक्ष आय के अवसर प्राप्त कर रहे हैं। इससे पर्यटन का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहकर गाँव-गाँव तक पहुँच रहा है और सांस्कृतिक पहचान भी मजबूत हो रही है। समग्र रूप से देखें तो छत्तीसगढ़ में पर्यटन अब दर्शनीय स्थलों की सूची भर नहीं रहा। यह रोजगार, कौशल, निवेश और पहचान का समेकित मॉडल बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री के विज़न और पर्यटन मंत्री की प्रतिबद्धता के साथ राज्य का पर्यटन क्षेत्र नए मुकाम की ओर अग्रसर है—जहाँ गाँव-गाँव का युवा इस विकास यात्रा का सक्रिय भागीदार बन रहा है।



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