कृति समीक्षा
इस
विनिबन्ध कृति में सम्पादन खण्ड के अन्तर्गत कला, संस्कृति और पर्यटन
साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर : डॉ. प्रभात कुमार सिंघल शीर्षक से विस्तृत आलेख लिखा
है। इस सन्दर्भ में इसका एक अंश ध्यातव्य है - " भारत भूमि एक ऐसी सांस्कृतिक
चेतना से सजी-संवरी भू-आकृति है जहाँ कला, संस्कृति और पर्यटन
की धाराएँ हजारों वर्षों से जीवन की गति और गरिमा को पोषित करती रही हैं। यह वही भूमि
है, जहाँ एक यात्रा सिर्फ गंतव्य तक पहुँचने का माध्यम नहीं,
बल्कि आत्मा के स्पर्श की प्रक्रिया बन जाती है। इसी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक
यात्रा में डॉ. प्रभात कुमार सिंघल जैसे व्यक्तित्व का प्रादुर्भाव हुआ, जिन्होंने न केवल कला, संस्कृति और पर्यटन को जिया,
बल्कि उसे शब्दों में बाँध कर जीवन्त कर दिया। वे एक ऐसे यायावर लेखक
हैं जिन्होंने पर्यटन को मात्र दृश्यावलोकन या भ्रमण न मानकर एक सांस्कृतिक संवाद और
ऐतिहासिक चेतना का माध्यम बनाया है। वे शब्दों में अनुभव को ढालने की उस विलक्षण कला
के धनी हैं जहाँ एक आम पाठक भी उनके साथ यात्रा करने लगता है। उनका पर्यटन लेखन अत्यंत
विस्तृत, शोधपूर्ण एवं जानकारी से परिपूर्ण है। इसमें भारतीय
पर्यटन की बहुआयामी परम्परा और उसके समकालीन स्वरूपों का सुन्दर चित्रण हुआ है,
साथ ही डॉ. सिंघल ने भारतीय पर्यटन की समग्रता, वैभवता, समृद्धता एवं सौन्दर्यता को प्रभावी ढंग से रेखांकित
किया गया है। निश्चित ही डॉ. सिंघल भारतीय पर्यटन साहित्य के मूर्धन्य हस्ताक्षर एवं
पर्यटन लेखन के शिल्पी हैं। उन्हें भारत पर्यटन दर्शन एवं लेखन के शब्द-ऋषि कहें तो
कोई अतिश्योक्ति नहीं है। "
सृजन
खंड में डॉ. प्रभात कुमार सिंघल की चयनित पुस्तकों के अंश प्रभावी रूप से प्रस्तुत
किए है। जिनमें क्रमशः तीर्थराज पुष्कर, वन्यजीव संरक्षण : चम्बल
घड़ियाल सेन्चुरी, Cultural Panorma of Udaipur, एशिया का सबसे
पुराना एवं भारत का सर्वश्रेष्ठ भारतीय संग्रहालय - कोलकाता, स्नॉर्कलिंग और स्कूबा डाइविंग, मन्दिर संस्कृति का प्रार्दुभाव,
देलवाड़ा के जैन मंदिर का जादुई स्थापत्य, सारे
तीरथ बार-बार गंगा सागर एक बार, बौद्ध धर्म का महान केंद्र बोधगया
मंदिर, भगवान कृष्ण की नगरी द्वारिका, कश्मीर
! स्वर्ग कहीं है तो यहीं है, यहीं है, यहीं ! , केरल के बैकवाटर का रोमांच, पर्यटक खिंचे आते हैं खजुराहो के मंदिरों की ओर तथा प्राकृतिक खूबसूरती से
श्रृंगारित ईटानगर के अंश हैं। अन्त में परिशिष्ट के अन्तर्गत लेखक डॉ. प्रभात कुमार
सिंघल तथा कृति के सम्पादक ललित गर्ग का जीवन वृत्त दिया गया है।
इस
कृति के महत्व और लेखक की सृजन विशेषता को उभारते हुए साहित्यागार प्रकाशन जयपुर के
प्रकाशक हिमांशु वर्मा ने पुस्तक के प्रथम फ्लैप पर प्रकाशक की ओर से ... में लिखा
है कि - "प्रकाशक के रूप में मैंने महसूस किया कि डॉ. सिंघल के लेखन की महत्वपूर्ण
विशेषता है कि पाठक को विषय की तथ्यात्मक और विवरणात्मक सूचनाएँ देकर उसे पर्यटन के
प्रति प्रेरित तो करता ही है साथ ही इनकी सभी पुस्तकें किसी शोध से कम नहीं है और शोधार्थियों
के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। इनकी कुछ पुस्तकें इतनी लोकप्रिय हुई कि साहित्यागार ने
उनके कई संस्करण प्रकाशित किए। इनके कला, संस्कृति और पर्यटन
साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर डॉ. प्रभात कुमार सिंघल लेखन में सामाजिक समरसता के दर्शन
होते हैं और विश्वास करता हूँ कि नई सोच और लेखन के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन
ला सकते हैं। देश के विख्यात यायावर साहित्यकार, पत्रकार और समाजसेवी
श्री ललित गर्ग द्वारा इन पर सम्पादित यह विनिबन्ध- कला, संस्कृति
और पर्यटन के पर्यटन प्रेमियों, इतिहासविदों, विद्यार्थियों, आम जिज्ञासु पाठक और शोधकर्ताओं के लिए
सार्थक और उपयोगी रहेगा। "
ऐसी
महत्वपूर्ण पुस्तक के सम्पादक पत्रकार, लेखक, समाजसेवी एवं सुदृढ़ लेखनी के धनी ललित गर्ग का जन्म अजमेर के प्रतिष्ठित समाजसेवी,
पत्रकार एवं साहित्यकार स्व. श्री रामस्वरूप गर्ग एवं श्रीमती चंद्रप्रभा
देवी गर्ग के यहाँ 24 सितम्बर 1964 को ननिहाल किशनगढ़ (अजमेर) में हुआ। आपने बी.कॉम.
करने के पश्चात राजस्थान विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में डिप्लोमा प्राप्त किया।
आप
विख्यात पत्रकार,
लेखक एवं स्तंभकार हैं। प्रतिदिन लगभग देश के सभी हिन्दी एवं अंग्रेजी
समाचार पत्रों में समसामयिक विषयों पर आपके लेखों का प्रकाशन होता है।। विगत दो दशक
से नवभारत टाइम्स के स्पीकिंग ट्री एवं दैनिक जागरण के ऊर्जा कॉलम सहित अनेक दैनिक
समाचार पत्रों में नियमित आध्यात्मिक लेखों का प्रकाशन होता रहा है। विगत चालीस वर्षों
से नियमित समाचार पत्रों में लेखन करते हुए आपका संवाद लेखन, पुस्तक समीक्षा एवं साक्षात्कार का विशेष अनुभव है।
लेखन
के साथ-साथ सम्पादन कला में आपकी विशेष दक्षता रही है। यही कारण है कि अणुव्रत पाक्षिक
का लगभग दो दशक तक सम्पादन करने के साथ-साथ आपने तेरापंथ टाइम्स एवं युवादृष्टि का
सम्पादकीय कार्य भी लम्बे समय तक निभाया है। इसके अलावा आपके सम्पादन में प्रकाशित
आध्यात्मिक विचारों से ओतप्रोत पत्रिका 'समृद्ध सुखी परिवार'
बहुत चर्चित रही है। इनके अलावा श्री विजय इन्द्र टाइम्स मासिक,
समाज दर्पण, अनुभूति, दृष्टि,
निर्गुण चदरिया (आचार्य श्री महाश्रमण अमृत महोत्सव स्मारिका),
आचार्य महाप्रज्ञ प्रवास समिति पत्रिका, स्वर्णिम
आभा सूरज की, गाथा पुरुषार्थ की, आध्यात्मिक
सम्पादन - 'उदय इंडिया' राष्ट्रीय अंग्रेजी/हिन्दी
साप्ताहिक, अतिथि सम्पादक युवादृष्टि, किसान
यात्रा संदेश आदि अनेक पत्र पत्रिकाओं में आपका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। आप विगत
वर्षों से 'लोकतंत्र की बुनियाद' मासिक
एवं 'सफर आपके साथ' मासिक के सम्पादकीय
सलाहकार हैं।
सांस्कृतिक
कार्यक्रमों के साथ-साथ साहित्यिक मंच के तहत समय-समय पर लेखक गोष्ठियाँ एवं साहित्यकारों
के सम्मान आपके नेतृत्व में संचालित होते रहे हैं। इन दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
एवं उससे जुड़े विद्या भारती उपक्रम के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। आप दिल्ली
से अखिल भारतीय स्तर पर विद्या भारती के विद्वत परिषद के सदस्य हैं एवं दिल्ली के संवाददाता
प्रमुख हैं। आप राजभाषा समिति, गृह मंत्रालय, भारत सरकार के सदस्य रह चुके हैं। आप वर्तमान में सूर्यनगर एज्यूकेशनल सोसायटी
(रजि.) एवं उसके द्वारा संचालित प्लैटिनम वैली इंटरनेशनल स्कूल, सूर्यनगर (गाजियाबाद) के कार्यकारी अध्यक्ष हैं।
आप
अनेक संस्थाओं से सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं। जिनमें मुख्य हैं- अध्यक्ष/महामंत्री-सुखी
परिवार फाउंडेशन,
जिसके माध्यम से गुजरात के आदिवासी अंचलों में स्कूल, छात्रावास, गौशाला आदि का संचालन, लॉयंस क्लब नई दिल्ली ऑफ अलकनंदा, मंत्री मारवाड़ी सम्मेलन,
दिल्ली, प्रचार-प्रसार मंत्री अणुव्रत महासमिति,
नई दिल्ली (2012-2013), अणुव्रत महासमिति
(2009-2010), कार्यालय मंत्री अणुव्रत महासमिति (1986-2000),
जैन विश्वभारती, दिल्ली (1990-2000), प्रबंधक अखिल भारतीय अणुव्रत न्यास (1987-1988), राष्ट्रीय
संयोजक अणुव्रत लेखक मंच, नई दिल्ली, अणुव्रत
नैतिक लेखन प्रतियोगिता-अणुव्रत न्यास, नई दिल्ली, मीडिया प्रभारी श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा, दिल्ली
(2012-2013, 2021-2022)
आपकी
उल्लेखनीय सेवाओं,
पत्रकारिता एवं लेखन के लिए अनेक पुरस्कार एवं सम्मान प्रदत्त किये गये
हैं जिनमें मुख्य हैं- आचार्य महाप्रज्ञ प्रतिभा पुरस्कार (2006) (एक लाख रुपए),
राष्ट्रीय चेतना पुरस्कार (1990), अणुव्रत लेखक
पुरस्कार (2011) (इक्यावन हजार), लायंस इंटरनेशनल के डिस्ट्रिक्ट
321 ए-1 के करीब 100 क्लबों में सर्वश्रेष्ठ अध्यक्ष का सम्मान एवं जोनल में भी सर्वश्रेष्ठ
अध्यक्ष का सम्मान।

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