समीक्षक -डॉ. ज्ञानप्रकाश 'पीयूष'

राजपुरा (सिसाय) हाँसी , हरियाणा के नामचीन साहित्यकार बलजीत सिंह किसी परिचय के मोहताज नहीं। इनकी साहित्य की विविध विधाओं में एक दर्जन से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वर्ष 2020 में हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी,पंचकूला से इनकी यात्रा-वृत्तांत पुस्तक 'काले पानी का सफेद सच' पर श्रेष्ठ कृति पुरस्कार प्राप्त हुआ था। अब तक इनकी यात्रा-वृत्तांत की छह पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें पाठकों ने काफी पसंद किया है।' गोवा से नेपाल तक' इनकी छठी यात्रा-वृत्तांत पुस्तक है। इस पुस्तक में इनकी कुल 10 यात्राएं सम्मिलित हैं।

पहली यात्रा भारत के खूबसूरत राज्य गोवा की है, जो 11 जुलाई से 13 जुलाई-2023 तीन दिनों में की गई थी। लेखक ने गोवा राज्य की खूबसूरती और विशेषताओं का सरल शब्दों में 35 पृष्ठों में विस्तार से चित्रण किया है। लेखक के अनुसार गोवा में समुद्र के किनारे सैलानियों का मेला हरदम लगा रहता है। यहाँ खाने-पीने से लेकर नाचने-गाने वालों की मस्ती देखकर ऐसा लगता है- मानो गोवा में मस्ती का मानसून हमेशा छाया रहता है। 

दूसरी यात्रा उन्होंने 11 सितंबर-2023 को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर तथा आसपास के क्षेत्रों की थी। यहाँ पातालपानी झरना व गुलावाट वैली , दोनों पर्यटन स्थल देखने लायक हैं। खासकर इंदौर शहर की छप्पन मार्केट , खाने-पीने के मामले में दुनिया में अपनी पहचान बना चुकी है।

तीसरी यात्रा 30 मार्च-2023 को हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से शहर तत्तापानी की है ,जो सतलुज नदी के तट पर बसा है। यहाँ गर्म पानी के चश्मों में नहाने से चर्म रोग दूर होते हैं। सतलुज नदी यहाँ एक झील जैसी आकृति बनाती है।

चौथी यात्रा 8 मई-2023 को उत्तराखंड राज्य के खूबसूरत शहर नैनीताल की है, जहाँ नैनी झील का प्राकृतिक सौंदर्य आने वाले सैलानियों का मनमोह लेता है। नैनीताल को सरोवर नगरी के नाम से भी जाना जाता है।

पाँचवीं यात्रा 18 फरवरी 2024 को हरियाणा के फरीदाबाद में लगने वाले सूरजकुंड मेले की है, जिसमें देश-विदेश से लाखों सैलानी खरीददारी करने आते हैं। यह मेला दुनियाभर में हस्तकला के लिए प्रसिद्ध है।

छठी यात्रा 26 फरवरी-2023 को मध्य प्रदेश के मांडू शहर की है,जहाँ रानी रूपमती का महल देखने योग्य है। यह शहर मध्यप्रदेश की धड़कन है , क्योंकि इसके दीदार से प्राचीन भारत की झलक दिखाई देती है।

सातवीं यात्रा छह व सात नवंबर-2022 की है , जो विश्व के सबसे प्राचीन शहर काशी नगरी की है, जिसे वर्तमान में बनारस या वाराणसी के नाम से भी जाना जाता है। यहाँ गंगा नदी के तट पर चौरासी घाट काफी प्रसिद्ध हैं। 

आठवीं यात्रा 8 अप्रैल-2024 की है, जो उत्तराखंड राज्य के राजाजी राष्ट्रीय उद्यान की है , जिसमें एशियाई हाथी, हिरण,लंगूर,बंदर, जंगली बिल्ली, नीलगाय, तेंदुए इत्यादि जीव-जन्तु देखे जा सकते हैं । यहाँ जीप द्वारा जंगल-सफारी करने का अलग ही मजा है।

नौवीं यात्रा राजस्थान के अलबेले शहर धौलपुर की है , जो 23 जून-2024 को की गई थी। धौलपुर चंबल नदी के तट पर बसा है। वैसे चंबल घाटी और चंबल नदी दोनों भारत में काफी प्रसिद्ध हैं। केसरिया रंग वाली पहाड़ियों से घिरे इस अनोखे शहर में मचकुंड सरोवर देखने लायक है।

दसवीं यात्रा हमारे पड़ोसी मुल्क नेपाल की है,जो चार अगस्त-2022 को की गई थी। यहाँ पर ठाकुरद्वारा नामक जगह पर बर्दिया राष्ट्रीय उद्यान काफी खूबसूरत है। यहाँ चिसापानी में कर्णाली नदी पर बना लोहे का विशाल पुल इंजीनियरिंग की अनोखी मिसाल है । इस यात्रा में लेखक के साथ उनकी पत्नी एवं मैं भी सम्मिलित था । यहाँ की यात्रा बड़ी रोमांचक एवं आनंदवर्धक रही।

इन यात्राओं का उद्देश्य पर्यटन-स्थलों का भ्रमण करते हुए प्राकृतिक सौंदर्य के सान्निध्य में रहना था। यह प्रकृति समस्त जीव-जंतुओं एवं प्राणियों को शरण देती है। पुस्तक की भाषा अत्यंत सरल एवं शैली रोचक एवं सारगर्भित है। पुस्तक पढ़ते समय भ्रमण स्थलों की खूबसूरती और उनकी विशेषताओं को घर बैठे ही सरलता से हृदयंगम किया जा सकता है। क्योंकि भ्रमण स्थलों से मेल खाते चित्र भी पुस्तक की शोभा बढ़ाते हैं। इसे रोचक, ज्ञानवर्धक एवं लोकोपयोगी बनाते हैं। अच्छी पुस्तक के लिए लेखक को हार्दिक धन्यवाद, शुभकामनाएं एवं बधाई। 

समीक्ष्य कृति : गोवा से नेपाल तक /लेखक  :  बलजीत सिंह /विधा : यात्रा वृत्तांत / प्रकाशक : न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन,नई दिल्ली-12 / प्रथम संस्करण : 2026. / मूल्य :₹ 299/-. पृष्ठ-168(प्लेन)