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| थार में आयोजित लोकनृत्य |
पर्यटन विभाग के संयुक्त निदेशक दलीप सिंह राठौड़ के अनुसार
उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के के निर्देशानुसार इस अभियान का मुख्य उद्देश्य
राजस्थान को “ईयर राउंड टूरिज्म डेस्टिनेशन” के रूप में स्थापित करना
है। विभाग इसके लिए डिजिटल कैंपेन, सोशल मीडिया स्टोरीटेलिंग, अनुभव आधारित पर्यटन
और कम चर्चित व अज्ञात स्थलों के प्रचार पर काम कर रहा है। दलीप सिंह के मुताबिक
अभियान के लिए विभिन्न शहरों की अलग-अलग थीम तैयार की गई हैं। जैसे की उदयपुर
झीलों को सवेरे और शाम के अनुभवों के साथ प्रचारित किया जाएगा, जबकि बूंदी को उसकी ऐतिहासिक गलियों और बावड़ियों के जरिए “हिडन हेरिटेज” डेस्टिनेशन के रूप
में प्रस्तुत किया जाएगा।
बूंदी शहर के एक महल का दृश्य
इसी प्रकार जयपुर औऱ जोधपुर में महलों, शाम के सांस्कृतिक
अनुभवों और हेरिटेज स्टे को अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा। पश्चिमी राजस्थान में
थार के रेगिस्तान व बाड़मेर को “सोलो ट्रैवल” और रेगिस्तानी अनुभवों के केंद्र के रूप में विकसित किया जा
रहा है।वन्यजीव पर्यटन को भी इस अभियान से जोड़ा जाएगा। रणथम्भौर नेशनल पार्क में गर्मियों के दौरान
वन्यजीवों की अधिक गतिविधियों को विशेष रूप से प्रचारित किया जाएगा, ताकि ऑफ-सीजन में भी
पर्यटकों की आवाजाही बनी रहे।
जोधपुर शहर का एक विहंगम दृश्य
पर्यटन विभाग ने डिजिटल कंटेंट, वीडियो स्टोरी, सोशल मीडिया रील्स सहित प्रचार सामग्री तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अभियान में पारंपरिक विज्ञापन की बजाय “अनुभव आधारित कहानी” को प्रमुखता दी जाएगी। विभाग का मानना है कि नई पीढ़ी केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि “यादगार अनुभव” तलाशती है। गौरतलब है की उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी पहले ही अधिकारियों को पर्यटन स्थलों पर विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित करने, कम प्रसिद्ध व अज्ञात स्थानों को बढ़ावा देने और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण के निर्देश दे चुकी हैं। हाल की उच्चस्तरीय बैठकों में पर्यटन ढांचे, हेरिटेज संरक्षण, सांस्कृतिक आयोजनों और क्षेत्रीय पर्यटन सर्किट विकसित करने पर जोर दिया गया।
संयुक्त निदेशक दलीप सिंह राठौड़ के अनुसार इस अभियान के
साथ होटल उद्योग, हेरिटेज प्रॉपर्टी संचालकों, ट्रेवल एजेंसियों और
स्थानीय कलाकारों को भी जोड़ा जाएगा। राज्य सरकार का प्रयास है कि ऑफ-सीजन पर्यटन
बढ़ने से स्थानीय रोजगार और छोटे पर्यटन कारोबार को भी लाभ मिले। राठौड़ ने कहा कि इस अभियान के जरिए राजस्थान की पहचान केवल
“विंटर टूरिज्म” तक सीमित नहीं रहेगी।
इससे लंबे समय तक ठहरने वाले पर्यटकों की संख्या भी बढ़ेगी साथ ही प्रदेश के कम
चर्चित पर्यटन स्थलों को भी नई पहचान मिलेगी
उदयपुर का दृश्य

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