अजीत शर्मा आकाश’, प्रयागराज

अनिल सोनी की पुस्तक पंख ज़िंदा हैउनकी नई कविताओं का संकलन है। इनके माध्यम से रचनाकार ने वर्तमान सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ के नग्न स्वरूप को चित्रित करते हुए विडम्बनाओं एवं विद्रूपताओं पर प्रहार किया है। रचनाओं में आम आदमी की प्रतिष्ठा, शहरी-ग्रामीण द्वंद्व समाज की विकृतियों, बौद्धिक पाखण्ड एवं विभिन्न प्रकार की असमानताओं पर तीखा व्यंग्य है तथा पारम्परिक मूल्यों को चुनौती देते हुए सामाजिक असमानता, कुण्ठा और यथार्थ एवं सामाजिक-राजनीतिक विद्रूपताओं तथा विसंगतियों पर कटाक्ष किया गया है। अधिकतर रचनाओं में प्रतीक एवं बिम्बों माध्यम से बात कही गयी है। समस्त रचनाओं में बौद्धिकता की प्रधानता परिलक्षित होती है।

रचनाओं के शिल्प के विषय में कहा जा सकता है कि किसी भी रचना का कविता होने के लिए उसमें छान्दसिकता, गीतात्मकता, प्रवाह, लय और छन्द शास्त्र का पालन वांछित होता है, किन्तु 1954 के आसपास हिन्दी काव्य-धारा में नई कविताके नाम से एक विधा का आगमन हुआ, जिसका काव्यशास्त्रीय छन्द-विधान से कोई लेना-देना नहीं था। पठन में यह गद्य के ही समीप प्रतीत होती थी। छन्द से दूर होने के कारण यह कविता आम जनों से कट गई थी। साधारण पाठक को इससे न तो कविता का आनन्द प्राप्त होता था, न ही उसकी भाषा-शैली उसको समझ आती थी। पंख ज़िंदा हैइसी नई कविता विधा की पुस्तक है, जिसकी रचना सम्भवतः बौद्धिक वर्ग के लिए ही की गयी है; क्योंकि समस्त रचनाओं में भावनाओं के साथ-साथ बौद्धिकता पर विशेष बल दिया गया परिलक्षित होता है। बिम्बों और प्रतीकों का विषयानुरूप प्रयोग इन रचनाओं की विशेषता है।

पुस्तक की रचनाओं में साहित्यिक भाषा के साथ-साथ हिन्दी, उर्दू तथा अंग्रेजी के प्रचलित शब्दों वाली आम बोलचाल की भाषा का भी प्रयोग किया गया है। इसके बावजूद कथ्य की सहज, सरल और स्वाभाविक अभिव्यक्ति नहीं हो पाती है। चारदीवारी, इनसान, इनसाफ जैसे कुछ शब्दों में वर्तनी-दोष है। प्रूफ सम्बन्धी अशुद्धियाँ भी कहीं-कहीं परिलक्षित होती हैं। पुस्तक में संग्रहीत कुछ रचनाओं के अंशः-

- देश चूर्ण की पुड़िया/ वादों की गुड़िया/ बातों के तमाशे.....(देश की दिहाड़ी)।

- जहाँ भक्ति के मारे हैं/ वहाँ आँखें नहीं होती......(जब आँखें उगती हैं)।

- मजबूरियों में किसी ने/ ज़रूर सुना होगा/ मुफ़्त के राशन का संवाद......(सोया हुआ संवाद)।

- भूख चाँदी की कटोरी में भी/ चोर निकली/ हर तिजोरी में भी/ भूख असली निकली......(भूख की थाली)।

- आज़ादी के वर्षों बाद/ देश ने बना डालीं/ देश भक्ति की/ अजीब कठपुतलियाँ/ ......(देश भक्ति का शो)।

- सौदेबाज़ी का हुनर/ कलम को मिल गया/ ताबूत के बीच पूरा/ अख़बार पसर गया......(ख़बर का नशा)।

- कोई अपना/ सीना माप रहा/ अब तो 36 से आगे/  56 इंच तक हो जाता सीना......(दूर की दिल्ली)।

- हर दिन मेरा/ कोई न कोई रिश्ता/ मरता है लेकिन/ व्हाट्स एप अब/ चीखने नहीं देता......(व्हाट्स एप चीखने नहीं (देता)।

- गज़ब के होते हैं वे जूते/ जो चलते नहीं/ महँगी कार में बैठ कर/ भ्रमण करते हैं......(थके हुए जूते)।

- अब फ़ासले बनाये जाते हैं/ ताकि समझौता/ अपनी शर्तों पर हो/ और फ़ासला/ वहीं का वहीं रहे.......(फ़ासले)।

-एक डाक्टर ही है जो/ तेज धार को/ बना देता है/ लाइफ सेविंग औजार......(दर्द से मुलाकात)।

- मीडिया अब/ पक रहा/ मसालेदार व्यंजन/ की तरह.....पत्रकार/ आका के दरबार में/ घंटी बजा रहा...(मीडिया का क़ब्रिस्तान)। 

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि पुस्तक बौद्धिक वर्ग के पाठकों के लिए लिखी गयी है। कथ्य की दृष्टि से पुस्तक इसलिए सराहनीय है, क्योंकि इसमें संग्रहीत रचनाओं के माध्यम से आज की स्वार्थपरक गन्दी एवं घिनौनी राजनीति, धार्मिक उन्माद, प्रदर्शनपरक देशभक्ति तथा मीडिया में व्याप्त चारण स्वरूप और भाटवृत्ति को साहसपूर्वक अनावृत करने का प्रयास किया गया है। रचनाएँ अपने युग की बड़ी बुराइयों पर तीखा वार करती हैं तथा इनका सामाजिक यथार्थ से गहरा सम्बन्ध है। अन्तिका प्रकाशन प्रा.लि. ग़ाज़ियाबाद द्वारा प्रकाशित 128 पृष्ठों की इस पुस्तक का मूल्य 445 रूपये है।

पुस्तकः पंख ज़िंदा है (कविता-संग्रह)/ लेखकः अनिल सोनी / प्रकाशकः अंतिका प्रकाशन प्रा.लि. ग़ाज़ियाबाद / मूल्यः 445 रूपये / पृ0सं0 :  128

-----------------------------------------------------------------------------------

 अजीत शर्मा आकाश’ : इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर। यूजीसी नेट। वर्ष 1980 से अब तक विभिन्न व्यावसायिक एवं लघु पत्र-पत्रिकाओं में अनेक गीत, ग़ज़ल एवं कविताएँ प्रकाशित। आकाशवाणी प्रयागराज द्वारा समय-समय पर काव्यपाठ प्रसारित। विभिन्न कविगोष्ठियों, कवि सम्मेलनों तथा साहित्यिक मंचों पर काव्यपाठ। प्रकाशित ग़ज़ल संग्रहः 1- ‘मैं जो कुछ भी देख रहा हूँ’ (2018) एवं 2- ‘फिर कोई सूरज उगेगा’ (2020)। सुप्रतिष्ठित साहित्यिक संस्था, पब्लिकेशन एवं त्रैमासिक पत्रिका गुफ़्तगू सहित अन्य अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित। ग़ज़ल एवं गीत-विधा में लेखन जारी।9838078756e-mail: aakash6937@gmail.com 

-----------------------------------------------------------------------------------------------