हिंदी साहित्य की विविध विधाओं में एक दर्जन से अधिक पुस्तकों के रचयिता, हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी पंचकूला से 'काले पानी का सफेद सच' पुस्तक पर श्रेष्ठ कृति पुरस्कार प्राप्त, तथा देश-विदेश की विविध साहित्यिक संस्थाओं से दो दर्जन से अधिक सम्मानों से अलंकृत, राजपुरा (हाँसी) हरियाणा के जाने-माने वरिष्ठ साहित्यकार बलजीत सिंह की सद्य प्रकाशित यात्रा-वृत्तांत कृति 'मालदीव के फिरोजी समंदर' प्राप्त हुई । इस पुस्तक में इनकी त्रिदिवसीय मालदीव यात्रा का सरल शब्दों में रोचक वर्णन अंतर्निहित है।
लेखक ने मालदीव के फिरोजी रंग के समुद्र का अवलोकन करने के उद्देश्य से सितंबर-2025 में अंबाला शहर से हवाई यात्रा का टिकट बनवाया , जिसमें 25 सितंबर से 27 सितंबर तक मालदीव में भ्रमण करने एवं 28 सितंबर को वापस लौटने का टिकट था ,जो कुल 50 हजार भारतीय रुपयों में तय हुआ। लेखक ने मालदीव में घूमने के लिए 27019 भारतीय रुपए के बदले तीन सौ अमेरिकी डॉलर हिसार-हरियाणा से खरीदे । घूमने-फिरने में लेखक के 233 डॉलर और मालदीव यात्रा का कुल खर्च 74 हजार भारतीय रुपए हुए । मालदीव की मुद्रा मालदीवियन रुपया है , जो भारतीय छह रुपयों के लगभग बराबर है ।
लेखक का कहना है कि समुद्री देशों की खूबसूरती में , मालदीव का नाम शीर्ष स्थान पर आता है । फिरोजी रंग वाले पानी की वजह से इसे हिंद महासागर का रत्न कहा जाता है। मालदीव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह धरती का सबसे निचला एवं रोमांटिक देश है ,जिनकी औसत ऊँचाई केवल पाँच फीट है । यहाँ पानी के नीचे रेस्टोरेंट आदि की सुविधाएँ भी उपलब्ध हैं । इस खूबसूरत देश में बारह सौ के आसपास द्वीप हैं ,जो छब्बीस एटोलों में बंटे हैं।
एटोल यानी प्रवाल द्वीप समूह , जो आपस में मिलकर समुद्र में एक घेरा-सा बनाते हैं , जिनकी आकृति अंगूठी जैसी है। लेखक ने इसे आसानी से समझाने के लिए मालदीव का मानचित्र कृति के अनुक्रम से पूर्व दिया है, जो क़ाबिले तारीफ़ है । इस मानचित्र को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि यह देश छब्बीस एटोलों से बना , मोतियों वाली माला की भांति नजर आता है । समुद्री सौंदर्य का अवलोकन करने वाले पर्यटकों के लिए यह देश जन्नत जैसा है । यहाँ दो हजार समुद्री जीवों की प्रजातियां पाई जाती है , इनमें डॉल्फिन ,शार्क, स्टिंगरे, मंटा रे ,मूंगे, केकड़े, झींगे, एवं समुद्री कछुए आदि हैं । पर्यटन की दृष्टि से मालदीप में समुद्र तट काफी प्रसिद्ध है ,जहाँ सफेद-सफेद समुद्र तटों के चारों तरफ फिरोजी रंग का पानी है । यहाँ की राजधानी माले है। भारत के पड़ोसी देशों में मालदीव और श्रीलंका ऐसे देश है , जिनकी समुद्री सीमा आपस में साथ लगती है । मालदीव एक छोटा सा देश है । यह हमारे दक्षिण भारत के केरल राज्य से काफी नजदीक लगता है । समुद्री रास्ते से कोच्चि और माले की दूरी करीब सात सौ किलोमीटर है और दिल्ली से माले की दूरी दो हजार सात सौ पचास किलोमीटर है । भारतीयों के लिए मालदीव में पर्यटन-वीजा बिल्कुल मुफ्त है । मालदीव में आप तीन दिन रहें या तीन महीने , आपको नब्बे दिन का पर्यटन वीजा मिल जाता है ।
लेखक ने किफ़ायती खर्चे के लिए ठहरने हेतु माले की अपेक्षा माफुशी द्वीप के पैराडाइज रिट्रीट होटल को चुना । इस होटल से सूर्यास्त के समय आसमान सतरंगी बादलों वाला नजर आता है । इस समय प्रकृति मानो पल-पल अपना रंग बदलती है । मालदीव के खूबसूरत द्वीपों पर अनेक प्रजाति के वृक्ष पाए जाते हैं , जिसमें नारियल,स्कू पाइन, मैंग्रोव ,बरगद, पपीता आदि प्रमुख हैं ।
मालदीव के समुद्र में सफेद रेत वाले टीले भी देखने को मिलते हैं ,जो देखने में नमक के ढेर-से लगते हैं । इन टीलों पर सैलानी चाव से घूमते हैं । लेखक ने मालदीव के सफेद टीलों पर घूमने का बड़ा लुफ़्त उठाया । उन्हें एक टीले की आकृति कुछ-कुछ अजगर जैसी लगी । सफेद टर्न पक्षियों ने उनका मन मोह लिया । मालदीव का राष्ट्रीय पक्षी 'सफेद छाती वाली जल मुर्गी' है , जो अपनी तेज आवाज़ के लिए प्रसिद्ध है ।
मालदीव में भोजन के रूप में सी-फूड अधिक मिलता है । यहाँ के स्थानीय लोग टूना मछली खाना पसंद करते हैं । शाकाहारी भोजन बहुत ढूँढने पर मुश्किल से मिलता है । लेखक को एक भोजनालय मिला ,जहाँ आलू के पराँठे खा कर काम चलाया ,जिसे चार हिस्सों में काट कर परोसा जाता था । मालदीव का गुलही द्वीप और कोरल गार्डन भी बहुत खूबसूरत हैं ।कोरल गार्डन समुद्र के तल में एक ऐसा क्षेत्र है , जिसमें तरह-तरह के मूंगे और क्लाउन फिश व एंजल फिश पाई जाती है । कोरल यानी मूंगा एक समुद्री जीव है , जो लाखों की संख्या में इकट्ठे होकर एक समूह बनाते हैं ,जिसे कोरल गार्डन कहा जाता है । कोरल गार्डन समुद्र में विभिन्न जीवों का एक बगीचा है । लेखक ने इसकी खूबसूरती और विशेषताओं का ज्ञानवर्धक व रोचक वर्णन किया है ।
मालदीव में मुख्यतः दो तरह के द्वीप हैं -- सार्वजनिक एवं निजी। एक द्वीप से दूसरे द्वीप पर जाने के लिए मोटरबोट एवं स्पीडबोट की सुविधा उपलब्ध है । निजी दीपों पर सी-प्लेन की सुविधा भी उपलब्ध है , जिसके माध्यम से सीधे समुद्री सतह पर उतरा जा सकता है , परन्तु इसका किराया बहुत महंगा है । मालदीप में आलीशान होटलों को देखकर ,आदमी दाँतों तले उंगली दबाने पर मजबूर हो जाता है । समुद्र के ऊपर कमरों की कतार और इसके बीच एक संकरा-सा गलियारा बड़ा अद्भुत है । गुलही द्वीप के काँच जैसे हरे पानी में एक शानदार झूला भी है । समुद्र के उथले पानी में स्नान करने और झूलने का आनंद एक साथ लिया जा सकता है । लेखक ने इसका भरपूर लाभ उठाया ।
निष्कर्षतः 'मालदीव के फिरोजी समंदर' यात्रा-वृत्तांत कृति का उद्देश्य - "हिंद महासागर की गोद में मोतियों जैसी माला की तरह नजर आने वाले मालदीव के खूबसूरत द्वीपों का दीदार करना और यहाँ होने वाली समुद्री गतिविधियों का भरपूर आनंद उठाना है ।" लेखक अपने उद्देश्य में सफल रहा । सरल शब्दों, मुहावरेदार भाषा और सरस शैली में मालदीव यात्रा का लेखक ने जो चित्रांकन किया है, वह स्तुत्य है । कृति की एक खास विशेषता यह भी है कि इसमें पर्यटन-स्थलों से मेल खाते जो सुंदर छायाचित्र लगाए हैं , वे केवल यात्रा को ही प्रमाणित नहीं करते ,अपितु सुधी पाठकों के मानस पटल पर उन स्थलों के छवि भी अंकित कर देते हैं। उत्कृष्ट कृति के लिए लेखक को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ।
समीक्ष्य कृति : मालदीव के फिरोजी समंदर / लेखक : बलजीत सिंह / विधा : यात्रा-वृत्तांत / प्रकाशक : न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन, नई दिल्ली-12 / प्रथम संस्करण : 2026 / मूल्य :₹ 225.00 / पृष्ठ- 124 (बिना जिल्द)

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