बलजीत सिंह खेती करते-करते कब लेखन की ओर मुड़ गए , इसका एहसास खुद बलजीत सिंह को काफी बाद में हुआ होगा । आज बलजीत सिंह पूर्ण रूप से लेखन को समर्पित है । घर की जिम्मेदारियों उठाते हुए ये अपना लेखकीय धर्म बखूबी निभा रहे हैं । कई विधाओं में लिखने के साथ-साथ ये यात्राओं में खास दिलचस्पी ले रहे हैं । घुमक्कड़ प्रवृत्ति के बलजीत सिंह देश-विदेश की लंबी-लंबी यात्राएं करते हैं । हर मोहक व आवश्यक दृश्यों के फोटो खींचते हैं । ऐतिहासिक इमारतों, खंडरों, मरुस्थल, समुद्र , नदी-नालों , झरनों, जंगलों, पहाड़ों, ग्लेशियरों , सुंदर वादियों , आकर्षक घाटियों , दुर्गम दर्रा, पशु-पक्षियों, जन-जीवन, सांस्कृतिक विरासतों को ध्यान से देखते हैं , उनके बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाते हैं । संस्कृति में रमते हैं, प्राकृतिक नजारों में खो जाते हैं , फिर अपनी कलम चलाते हैं । लेखक को मंदिरों में लगी लंबी कतारों में खड़े होने की बजाय प्राकृतिक सुषमा को निहारना , पर्यटन स्थलों की यात्रा करना ज्यादा अच्छा लगता है। नदी, झरने, जंगल, पर्वत, समुद्र इन्हें ज्यादा लुभाते हैं । पिछले दिनों भी इन्होंने बाली के द्वीपों तथा मालदीव के समुद्री स्थलों की यात्रा की तथा इन यात्राओं पर पुस्तक लिखी । अभी हाल ही में यात्रा पर लिखी , इनकी एक पुस्तक मेरे हाथों में आई -- 'मालदीव के फिरोजी समंदर' ।
लेखक ने पिछले दिनों 'मालदीव' की यात्रा की तथा उस यात्रा पर एक पुस्तक लिखी । बलजीत सिंह की नई पुस्तक 'मालदीव के फिरोजी समंदर' मालदीव यात्रा का विस्तृत व रोचक वर्णन है । 25 सितंबर-2025 से 28 सितंबर-2025 तक की गई यात्रा की कहानी कहती पुस्तक को लेखक ने तारीख के हिसाब से मुख्य चार भागों में बांटा है । हर भाग एक दिन की यात्रा का समस्त विवरण है । कुल 124 पृष्ठों की इस पुस्तक में लेखक ने पुस्तक की रोचकता बढ़ाने, दृश्यों का अवलोकन करने तथा पुस्तक की प्रामाणिकता व महत्व बढ़ाने के उद्देश्यों से 45 छायाचित्र भी दिए हैं , जो मालदीव के सौंदर्य व आकर्षण की कहानी कहते प्रतीत होते हैं । मालदीव समुद्र में डूबे हुए पर्वतों के द्वीपों का देश है , किन्तु यहाँ उभरे हुए पहाड़ नहीं है , ना ही विशाल घाटियाँ , ना ही झरने या नदियां हैं । मालदीव हिंद महासागर में स्थित एक द्वीप समूह है । पीने के लिए यहाँ के लोग वर्षा जल पर निर्भर हैं या फिर समुद्र से यंत्रों से साफ करके पानी उपलब्ध होता है यहां ऊंचे पहाड़, झरने नदियां, ग्लेशियर , सुंदर घाटियाँ नहीं हैं , फिर भी मालदीव की सुंदरता हर वर्ष हजारों पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है । लेखक बलजीत सिंह ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि मालदीव समुद्री सौंदर्य तथा यहां के फिरोजी रंग के पानी की वजह से , इसे हिंद महासागर का रतन कहा जाता है । मालदीव धरती का निचला देश है , फिर भी यहां पानी के नीचे आपको रेस्टोरेंट देखने , रहने को मिलेंगे ।
लेखक ने पुस्तक में जानकारी दी है कि यहां 1200 के आसपास छोटे-बड़े द्वीप हैं जो 26 एटोलो में बंटे हैं । एटोल यानी प्रवाल द्वीप समूह । अगर हम मालदीव के मानचित्र को देखते हैं तो ये 26 एटोल , हिंद महासागर में एक माला में पिरोये मोतियों की तरह दिखाई देते हैं । लेखक का कहना है कि समुद्री गतिविधियों में रुचि लेने वाले यात्रियों के लिए मालदीव किसी जन्नत से कम नहीं । यहाँ दो हजार से अधिक समुद्री जीवों की प्रजातियां पाई जाती हैं , जिनमें डॉल्फिन, शार्क, स्टिंगरे , मंटा रे, मूंगे, केकड़े, झींगे, समुद्री कछुए इत्यादि शामिल हैं । यह एशिया का सबसे छोटा देश है , जो मात्र 298 वर्ग किलोमीटर में फैला है ।
लेखक ने लिखा है कि पर्यटन की दृष्टि से मालदीव में सफेद रेत वाले टीले काफी प्रसिद्ध है । मालदीव की राजधानी माले और इसके बगल वाले 'हुलहुले' द्वीप पर वेलाना अंतर्राष्ट्रीय हवाई-अड्डा , यहां का मुख्य हवाई-अड्डा है । देश की कुल जनसंख्या साढ़े पांच के करीब है और यहां की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की विशेष भूमिका है । समझो मालदीव में रोजाना पांच-छह हजार के आसपास पर्यटक आते हैं । एक द्वीप से दूसरे द्वीप पर जाने के लिए , छोटी-बड़ी अनेक तरह की मोटरबोटें चलती हैं । कुछ निजी द्वीपों पर सी-प्लेन की सुविधा भी है । मालदीव में आलीशान होटलों को देखकर , आदमी दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर हो जाए । समझो समुद्र के ऊपर कमरों की कतार और इनके बीच एक संकरा सा गलियारा । मोटरबोट के माध्यम से मालदीव में घूमने का अलग ही अनुभव है । मालदीव एक छोटा सा देश है । यह हमारे दक्षिण भारत के केरल राज्य से काफी नजदीक लगता है । समुद्री रास्ते से कोच्चि और माले की दूरी करीब सात सौ किलोमीटर और दिल्ली से माले की दूरी 2750 किलोमीटर है । दिल्ली से माले तक चार घंटों का हवाई सफर काफी रोमांचक । आसमान से जब हम मालदीव के खूबसूरत द्वीपों को देखते हैं , इनके चारों तरफ समुद्र में फिरोजी रंग की झलक नजर आती है । भारतीयों के लिए मालदीव में पर्यटन वीजा बिलकुल मुफ्त । भाषा की अगर बात करें , यहां के स्थानीय भाषा मालदीवियन है । कुछ लोग हिंदी बोलने वाले भी मिल जाएंगे , मगर आमतौर पर अंग्रेजी का प्रचलन ज्यादा है । प्रत्येक देश की अपनी अलग-अलग मुद्रा होती है और मालदीव की मुद्रा है -- मालदीवियन रुपिया । फिलहाल एक मालदीव रुपया , हमारे छह भारतीय रुपयों के बराबर ।
यात्रा के दौरान लेखक को माले द्वीप की अपेक्षा माफुशी द्वीप पर ठहरने का मन बनाया । माफुशी एक सार्वजनिक द्वीप है , जो माले शहर से मात्र अट्ठाइस किलोमीटर दूर 'दक्षिण माले एटोल' में पड़ता है । यह समुद्र किनारे मुलायम-मुलायम सफेद रेत और सूर्यास्त के आसमान में सतरंगी बादलों वाला नजारा बड़ा प्यारा । मतलब बादलों में इंदरधनुष के रंगों जैसी झलक । खासकर क्षितिज में हरा-नीला- लाल-पीला एवं नारंगी सा आसमान और ऐसे में सूर्यास्त का नजारा देखना ,किसी जादूगर वाले खेल से कम नहीं था। समझो शाम के समय , यहाँ प्रकृति अपना पल-पल में रूप बदल रही थी । मालदीव के खूबसूरत द्वीपों पर अनेक प्रजाति के वृक्ष पाए जाते हैं , जिनमें नारियल, स्कू पाइन, मैंग्रोव , बरगद , पपीता इत्यादि । यहां घूमने का सबसे अच्छा समय नवंबर से फरवरी के बीच माना जाता है । मालदीव में अधिकतर पर्यटक केवल समुद्री गतिविधियों के उद्देश्य से आते हैं । पुस्तक में लिखा है कि यहां स्नॉर्कलिंग , स्कूबा डाइविंग , जेट स्कीइंग , नाइट फिशिंग , व्हेल समबरीन, सर्फिंग एवं पैरासेलिंग जैसी गतिविधियां , इस देश को साधारण से विशेष बनाती हैं। स्नार्कलिंग विधि के माध्यम से हम समुद्र में कोल्ड गार्डन /रंगीन मूंगे के उद्यान तथा अन्य समुद्री जीवों का दीदार कर सकते हैं । सुरक्षा जैकेट पहनकर इस गतिविधि को आसानी से किया जा सकता है । इतना ही नहीं इसके माध्यम से हम नर्स शार्क एवं स्टिंगरे जैसी मछलियों को आसानी से देख सकते हैं ।
पुस्तक पढ़ने से पाठकों को मालदीव के इतिहास, संस्कृति, रहन-सहन , होटल, यातायात के साधन, एडवेंचर गतिविधियों, समुद्री जीवों, समुद्र तट सौंदर्य, वहां रहने- खाने, घूमने की व्यवस्था, समुद्री जीवों के बीच तैरने के मौके , सब कुछ इस पुस्तक में लिखा है । तीन दिवसीय इस यात्रा में लेखक ने हर रोज की समस्त गतिविधियां , अपनी यात्रा के बारे में विस्तार से लिखा है , वह भी सरल भाषा में , रोचक तरीके से । वहां के मनभावन दृश्य, समुद्री तटों का आकर्षण , मौज-मस्ती सब लिखा है , वो भी सचित्र । पुस्तक में छपे चित्र अपनी कहानी खुद कहते हैं । जब पाठक इस पुस्तक को पढ़ता है और चित्र देखता है तो लगता है , वह खुद मालदीव की यात्रा पर है और यही पुस्तक की खासियत है । पढ़ते समय रोचकता बनी रहती है । अगर किसी ने मालदीव की यात्रा करनी हो तो जाने से पहले इस पुस्तक को पढ़ना उसके लिए सुविधाजनक होगा , क्योंकि इस पुस्तक में मालदीव के बारे में अधिकाधिक जानकारियां दी गई हैं । घुमक्कड़ लेखक बलजीत सिंह की पुस्तक 'मालदीव के फिरोजी समंदर' पठनीय, उपयोगी व संग्रहणीय है । यह पुस्तक पर्यटन को भी बढ़ावा देने में अपनी अहम भूमिका अदा कर सकती है । लेखक को साधुवाद ।
पुस्तक का नाम -- मालदीव के फिरोजी समंदर /लेखक -- बलजीत सिंह / विधा -- यात्रा-वृत्तांत / प्रकाशक -- न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन , नई दिल्ली / प्रथम संस्करण -- 2026 / मूल्य -- 225 रुपए / पृष्ठ -- 124

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