समीक्षा
समीक्षक -डॉ.दीप्ति गौड़.
कहानियों का एक निराला संसार होता है.बचपन के दिन भी क्या खूब होते हैं.हमारी दादी,नानी दादा,दादी और माँ -पिताजी हमें तमाम तरह के किस्से और कहानियाँ सुनाते हैं.पर आज बदलते -दौर में ये सब,हमारे मोबाइल दादा ने बदल दिया है.
दोस्तों,अब आपका ज्यादा समय इन्हीं मोबाइल दादा के साथ गुजरता है.आपको कोई कहानी सुननी होती है तो आप मोबाइल से सुन लेते हैं.चलिए,यह भी जरूरी है कि हम समय के साथ चलें! नहीं तो पीछे रह जाएंगे.
लेकिन दोस्तों,जो मज़ा किताबें पढ़ने में आता है,वह शायद कहीं और नहीं.कहानी की किताबें आपकी दोस्त बन जाती हैं.वे आपसे बातें करतीं हैं.आपके सपनों में भी आती हैं.
प्रसिद्ध बाल साहित्यकार ऋषि मोहन श्रीवास्तव की एक किताब आयी है -जिसका नाम है -"सदाबहार कहानियाँ "."क्या आपको भी कहानियाँ पढ़ना पसंद है?तो आप इस कहानी -संग्रह को अवश्य पढ़िएगा
इस बाल कहानी -संग्रह में कुल 9कहानियाँ दी गईं हैं.
बिल्कुल न घबराइए,कहानियाँ सब छोटी हैं,पर हैं सब एक से बढ़कर एक.आपको बहुत पसंद आएंगी.
कहानियों के शीर्षक हैं "-सगाई की अंगूठी,अब कभी गलती नहीं करेंगे,बुआ की घड़ी,मन्नू टेम्पो वाला,लॉक डाउन के बाद,बस झूठ नहीं, लड्डू की गिनती,मेरा प्यारा मिट्ठू और चिनकी को समझ आई."
पहली कहानी -"सगाई की अंगूठी "में -चुनमुन गिलहरी की सगाई बड़ी धूमधाम से,जंगल के साथियों के बीच होती है.चुनमुन को उसके दूल्हे द्वारा सुन्दर सी अंगूठी पहनाई जाती है.चुनमुन बड़ी ख़ुश थी.पर एकदम से सब माहौल बदल जाता है.सगाई से ख़ुश होने वाली चुनमुन रोने लगती है.सब चकित, अभी तक चुनमुन खूब हँस रही थी.पर अब क्या हो गया!जो.......
हुआ ये था कि चुनमुन की सगाई वाली अंगूठी कहीं गिर गईं थी.चुनमुन की मम्मी टुनमुन उसे प्यार से समझा रही थीं -"बिटियारानी,तुम अपनी सहेलियों के साथ सब जगह जाकर देखो,जहां -जहां पहले गईं हो.
चुनमुन जैसे -ही नीम के पेड़ के पास जाती है,उसे चमकती हुई उसकी अंगूठी मिल जाती है.
चुनमुन ख़ुश हो जाती है.पार्टी का मज़ा फिर वापिस आ जाता है.
अगली कहानी भी रोचक और शिक्षाप्रद है.-"अब कभी गलती नहीं करेंगे " स्कूल की छुटटी होने से दिनेश,विवेक और राघव एक योजना बना कर,घर में बगैर बताए चल पड़ते हैं एक अमरूद वाले बगीचे में मुफ्त के अमरूद खाने,पर उनकी अमरूद चोरी पकड़ी जाती है.वे सब वहां बगीचे के चौकीदार की गिरफ्त में होते हैं.चौकीदार शेरसिंह बच्चों से उनके पिता के मोबाइल नम्बर लेता है और बच्चों के पिता को बगीचे में बुला लेता है.बच्चों के पिता की बात मानकर चौकीदार,बच्चों को छोड़ देता है,लेकिन बच्चों के द्वारा अमरूद चोरी को बुरा बताता है.बच्चों के पिता बच्चों को इस बार माफ करने के लिए कहते हैं.
राघव,विवेक,और दिनेश भी अपने -अपने पिता से गलती के माफ़ी मांगते हैं.वे कहते हैं -"अब कभी गलती नहीं करेंगे."
अगली कहानी है -"बुआ की घड़ी "
.गिरिजा बुआ,शब्दार्थ को उसके जन्म दिन पर घड़ी देतीं हैं.यह सुन्दर घड़ी,स्कूलमें चोरी हो जाती है.निखिल नाम का छात्र शब्दार्थ की घड़ी चोरी करता है.बाद में उसका मन उसे चोरी के लिए धिक्कारता है.वह एक स्लिप पर अपनी माफ़ी के बारे में लिखता है और स्कूल कैंटीन की मेज पर घड़ी रख देता है.
घड़ी मिल जाती है.शब्दार्थ भी ख़ुश हो जाता है.
ऋषि जी द्वारा लिखित कहानियों में अगली कहानी है -"मन्नू टेम्पो वाला ".मन्नू के टेम्पो में एक दादाजी अपना बैग भूल जाते हैं.मन्नू टेम्पो वाला दादाजी को तलाश कर बैग वापिस करता है.
कहानी -"लॉक डाउन के बाद "में,कोरोना के समय न केवल इंसान परेशान हुए,वल्कि जंगल के जानवर भी परेशान हुए.
देखा जाए तो बाल कहानी -संग्रह" -सदाबहार कहानियाँ "बच्चों के लिए पठनीय,शिक्षाप्रद,और मनोरंजन के योग्य है.
संग्रह का प्रकाशन आकर्षक रंगीन कवर के साथ पूनम प्रकाशन,6-बी पुराना सीलमपुर दिल्ली -31ने किया है.बैक कवर पर लेखक का परिचय दिया गया है.
संग्रह का मूल्य 160/-सही नहीं लगता.बच्चों के कहानी -संग्रह की कीमत 100/-रुपए से कम होना चाहिए.हम तभी बच्चों को अच्छा बाल साहित्य उपलब्ध करवा पायेंगे.प्रकाशक आगे से इस विषय में भी सोचेंगे.कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि बाल कहानी -संग्रह स्वागत योग्य है.मुद्रण भी ठीक है

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