भाषा देश के स्वाभिमान से जुड़ा प्रश्न है : कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा

वर्धा, 1 सितंबर 2026: हिंदी देश की विविध भाषाओं और संस्कृतियों को जोड़ने वाली सशक्त कड़ी है। दक्षिण से उत्तर भारत तक हिंदी संवाद और आपसी जुड़ाव का माध्यम बनकर देश को एक सूत्र में बांधने का कार्य कर रही है। यह बात नागपुर परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक संदीप पाटील ने मंगलवार को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में हिंदी माह के शुभारंभ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में कही। विश्वविद्यालय के राजभाषा विभाग की ओर से आयोजित समारोह का शुभारंभ गालिब सभागार में दीप प्रज्वलन एवं विश्वविद्यालय के कुलगीत के साथ हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की, जबकि वर्धा के जिला पुलिस अधीक्षक सौरभ अग्रवाल विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

पाटील ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि विकास और सुशासन का महत्वपूर्ण आधार भी है। जब सरकार की योजनाओं और नीतियों की जानकारी आम लोगों तक उनकी सहज भाषा में पहुंचती है, तो प्रशासन और नागरिकों के बीच विश्वास और संबंध अधिक मजबूत होते हैं। उन्होंने हिंदी को देश के आर्थिक विकास से जोड़ते हुए कहा कि भाषाओं का विकास प्रशासन को अधिक प्रभावी और जनोन्मुख बनाता है।

उन्होंने कहा कि भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों ने देश की सार्वभौमिकता, अखंडता और प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए क्षेत्रीय भाषाओं में गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इससे ग्रामीण और छोटे शहरों के विद्यार्थियों को भी समान अवसर मिल सकेंगे।

पाटील ने भाषा को व्यक्तित्व विकास से जोड़ते हुए कहा कि किसी भाषा पर अच्छा अधिकार व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारता है, संवाद को प्रभावी बनाता है और सामाजिक सौहार्द को बढ़ाता है। उन्होंने मातृभाषा को संस्कारों की आधारभूमि बताते हुए कहा कि मातृभाषा के माध्यम से ही अच्छे संस्कार और सभ्य अभिव्यक्ति सहज रूप से विकसित होती है। उन्होंने युवाओं से सकारात्मक एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने का आह्वान करते हुए योग और ध्यान को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व विकास के लिए मन का संतुलन और चित्त की स्थिरता आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से मजबूत, संतुलित और सर्वसमावेशी नागरिक बनने का आह्वान किया।

जिला पुलिस अधीक्षक सौरभ अग्रवाल ने कहा कि भाषा लोगों को सहजता से जोड़ने का माध्यम है और हिंदी देशवासियों के बीच संवाद एवं आत्मीयता का सेतु बन रही है। उन्होंने कहा कि हिंदी को मजबूत बनाने के लिए इसके प्रयोग को बढ़ाना होगा। उन्होंने युवाओं से हिंदी में अधिकाधिक लेखन करने और कलम की ताकत के माध्यम से भाषा को समृद्ध बनाने का आह्वान किया।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि भाषा देश के स्वाभिमान से जुड़ा प्रश्न है और आत्मनिर्भरता की संकल्पना भारतीय भाषाओं के सशक्तिकरण से अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है। भाषा हमारे आत्मबोध और भावबोध का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा अपनी सांस्कृतिक परिधि में ही जीवंत और प्रभावशाली रूप ग्रहण करती है।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में हिंदी राष्ट्रीय एकता का पर्याय बन गई थी। हिंदीतर प्रदेशों के अनेक नेताओं ने भी हिंदी को जनजागरण और राष्ट्रीय एकता के माध्यम के रूप में स्वीकार किया। लोकमान्य तिलक, बाबूराव पराड़कर, सुभाषचंद्र बोस और सी. राजगोपालाचारी जैसे नेताओं ने हिंदी के प्रसार और राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रो. शर्मा ने कहा कि वैश्वीकरण ने भारतीय भाषाओं के विकास के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। भारतीय भाषाओं ने डिजिटल क्रांति के साथ सामंजस्य स्थापित किया है। यही कारण है कि मीडिया, फिल्म और ओटीटी जैसे नए क्षेत्रों में भारतीय भाषाओं के माध्यम से रोजगार के व्यापक अवसर सृजित हो रहे हैं। उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए भारतीय भाषाओं के प्रति सम्मान का भाव बढ़ाने और भाषाई हीनताबोध एवं पराजित मनोवृत्ति को त्यागने का आह्वान किया।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने मुख्य अतिथि संदीप पाटील और विशिष्ट अतिथि सौरभ अग्रवाल का विश्वविद्यालय का प्रतीक चिह्न, शॉल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन हिंदी अधिकारी राजेश कुमार यादव ने किया तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी के संदेश का वाचन किया। कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान ने आभार व्यक्त किया।

हिंदी माह के अंतर्गत विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रचार-प्रसार, राजभाषा के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विभिन्न हिंदी विषयक प्रतियोगिताओं एवं गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। समारोह में अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।