हिंदी में भारतीय संस्कृति और विनम्रता का भाव समाहित है :  कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा 

वर्धा, । महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में केंद्रीय संचार ब्यूरो, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार, नागपुर कार्यालय तथा विश्वविद्यालय के राजभाषा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी दिवस एवं पोषण माह के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के पुरस्कार वितरण समारोह में वरिष्ठ संपादक आनंद निर्बाण ने कहा कि “हिंदी मां जैसी है, जो हर रिश्ते को जोड़कर रखती है। हिंदी का पोषण करना हम सबकी जिम्मेदारी है।” उन्होंने कहा कि हिंदी की सबसे बड़ी विशेषता उसका समावेशी स्वरूप है। इसमें अनेक भारतीय भाषाओं के शब्द सहज रूप से समाहित हुए हैं, जिससे इसकी संप्रेषणीयता और व्यापकता बढ़ी है।

मंगलवार को विश्वविद्यालय के ग़ालिब सभागार में आयोजित समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की। इस अवसर पर कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान, हिंदी अधिकारी राजेश यादव तथा केंद्रीय संचार ब्यूरो, नागपुर के सहायक प्रचार अधिकारी शुभम गुड़धे मंचासीन रहे।

मुख्य अतिथि आनंद निर्बाण ने हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना के पीछे महाराष्ट्र और विशेष रूप से मराठी भाषी समाज के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि 1975 में नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन ने हिंदी को वैश्विक मंच प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि हिंदी के विकास और उसे राजभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के प्रयासों में नागपुर का योगदान ऐतिहासिक रहा है। अनंत गोपाल शेवड़े सहित अनेक मराठी भाषियों ने हिंदी के लिए उल्लेखनीय कार्य किया।

भाषा में संस्कृति और विनम्रता का समावेश

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि कोई भी भाषा अपने सांस्कृतिक प्रतीकों के माध्यम से जीवित रहती है। हिंदी में भारतीय संस्कृति और विनम्रता का भाव समाहित है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को हिंदी की मूल प्रवृत्ति और संवेदनशीलता को बनाए रखते हुए अपने समय और अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप भाषा को आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने हिंदी के विकास में पत्रकारिता की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि ‘सरस्वती’ पत्रिका हिंदी की पाठशाला रही है। आज मीडिया के माध्यम से हिंदी और भारतीय भाषाओं में रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं तथा हिंदी के अनेक बहुआयामी रूप सामने आए हैं। उन्होंने भाषा को समय के साथ विकसित होने वाली जीवंत परंपरा बताते हुए युवा पीढ़ी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

प्रतियोगिताओं के विजेताओं को मिले पुरस्कार

समारोह में हिंदी माह के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। टंकण प्रतियोगिता में अश्विनी राठोड़ ने प्रथम, राधा ठाकरे ने द्वितीय तथा अमोल आड़े और वैशाली कदम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। निबंध प्रतियोगिता की विद्यार्थी श्रेणी में मो. सोहैल अली, मीनाक्षी पटले और वेद प्रकाश कुमार क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय रहे। कर्मचारी श्रेणी में आयुषा वानखेडे, रविंद्र वानखडे और धनंजय भट्टाचार्य ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया। रंगोली प्रतियोगिता की कर्मचारी श्रेणी में प्रगति मिरगे ने प्रथम तथा अतिथि अध्यापक डॉ. अंजना किशनपुरी ने द्वितीय पुरस्कार प्राप्त किया। विद्यार्थी श्रेणी में प्रिया माली, शिवानी लाटे और अनन्या अभिलिप्सा दास ने क्रमशः प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान हासिल किया। पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता में होंग हुओंग क्वीन्ह ने प्रथम, अनन्या अभिलिप्सा दास ने द्वितीय तथा बिशमा देवी ने तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया। विजेताओं को कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा एवं मुख्य अतिथि आनंद निर्बाण ने पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र प्रदान किए।

कार्यक्रम का स्वागत एवं प्रास्ताविक केंद्रीय संचार ब्यूरो, नागपुर के सहायक प्रचार अधिकारी शुभम गुड़धे ने किया। संचालन जनसंपर्क अधिकारी बी. एस. मिरगे ने तथा आभार प्रदर्शन कुलसचिव क़ादर नवाज़ ख़ान ने किया। इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के गीत एवं नाटक प्रभाग के कलाकारों ने पोषण के महत्व पर आधारित प्रबोधनात्मक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।